
Squid Game or Brothers Home: साउथ कोरिया की सिरीज स्क्विड गेम तो आपने देखी ही होगी..इसमें गरीब बेरोजगार लोगों को एक जगह इकठ्ठा किया जाता है और बड़ी प्राइज मनी के लालच में गेम्स खिलाए जाते है। लेकिन हारने वाले को गेम से बाहर नहीं किया जाता बल्कि शूट कर दिया जाता है। ये एक कहानी नहीं बल्कि सच्चाई है कोरिया के ब्रदर्स होम की।
बेघर को घर देने के लिए खोला Brothers Home
1976 से 1987 तक दक्षिण कोरिया के बुसान में पूर्व आर्मी जनरल चुन डू-ह्वान के शासन में ब्रदर्स होम शुरू किया गया। युद्ध से तबाह कोरिया लंगड़ाने लगा था, लेकिन धीरे धीरे देश के हालात सुधरने लगे, और देश को कल्याणकारी नीतियों की जरूरत थी। कोरिया में 1986 के एशियन गेम्स और 1988 के ओलंपिक गेम्स भी होने वाले थे। इसलिए सड़क पर रहने वालों को घर देना जरूरी था। इसके लिए करीब 36 अनाथालय और कल्याण केंद्र खोले गए। सरकार को ऐसी कोई भी चीज नहीं चाहिए थी जो देश की इमेज खराब करे..इसमें बेघर लोग भी शामिल थे। इसलिए orphanage के नाम पर brothers home खोला गया।
यातना शिविर में बदले Orphanage
सड़क पर रहने वाले बच्चों और “समाज के लिए अयोग्य” समझे जाने वाले लोगों को हिरासत में लेकर सड़कों को “शुद्ध” करने के उद्देश्य से इसे एक सुविधा में बदल गया। बुसान जैसे बड़े शहरों में “आवारा लोगों के परिवहन वाहन” लिखे हुए बोर्ड वाली बसें दिखाई देने लगीं। इन्हीं में लोगों को ब्रर्दर्स होम में लाया जाता था। लेकिन धीरे धीरे ये orphanage यातना शिविर में बदल गया। इसकी दिवारों के पीछे यातना, मानव तस्करी, और बलात्कार किए जाते थे। कारखानों और खेतो में इनका गुलाम मजदूर के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
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Squid Game or Brothers Home: राष्ट्रपति चुन डू-ह्वान ने उस वक्त के प्रधानमंत्री डक-वू को पत्र भी लिखा था जिसमें भीख मांगने वालों पर नकेल कसने और आवारा लोगों के लिए सुरक्षात्मक उपाय करने” का आदेश के अलावा ये भी कहा गया की पुलिस को इन शिविरो में लोगों को भेजकर सड़कों को “शुद्ध” करने के लिए पुरस्कृत किया गया जाएगा। हुआ भी ऐसा ही बेघर लोगों, विकलांग लोगों, कुछ अनाथ बच्चों और यहां तक कि आम नागरिकों को भी, जो पूछे जाने पर अपना पहचान पत्र नहीं दिखा पाए, कथित तौर पर “सामाजिक शुद्धिकरण परियोजनाओं” के तहत इन केंद्रों में ले जाया गया था।
Squid Game or Brothers Home: सालों तक बंद रहे लोग
बर्दर्स होम के मालिक अक्सर कहा करते थे की वो लोगों को खाना देने, घर देने और शिक्षित करने का काम कर रहे है। पेपर्स में बर्दर्स होम में आने वाले लोगों को केवल 1 साल के लिए ही अंदर रखा जाना था और ट्रेनिंग देकर समाज में वापस छोड़ दिया जानवा था। लेकिन कई लोगों को सालों साल वहां रखा गया। इस दौरान उन लोगों पर ऐसी-ऐसी यातनाएं की गई की सोचकर ही रूह कांप जाए। इन लोगों को हर दिन, सड़ी हुई मछलियाँ और बदबूदार जौ का चावल मिलता था। लगभग सभी कैदी कुपोषित थे। चार लोग एक छोटे से बिस्तर पर ZigZag तरीके से सोते थे। और कमरों के कोने में हर रात बलात्कार होता था।
एक रिपोर्ट के मुताबिक वहां कैद लोगों ने भागने का सपना देखा, कुछ ने भागने की कोशिश भी की, लेकिन गार्डों को चकमा देकर 23 फीट ऊंची बाड़ को कूदना लगभग नामुमकिन था, अगर कोई भागने की कोशिश करता और पकड़ा जाता तो उसे पीट पीटकर मार दिया जाता। बर्दर्स होम से जीवित बसे लोगों की कहानी से समझिए की वहा के क्या हालात थे।
प्राइवेट पार्ट को लाइटर से जलाया!
चोई सेउंग-वू ने बताया की जब वो 13 साल के थे जब उन्हें स्कूल से घर लौटते समय सड़क से उठा लिया गया था। उन्होंने बीबीसी को बताया, “एक पुलिस अधिकारी ने मुझे रुकने को कहा और मेरे बैग की तलाशी लेने लगा।” “उसमें आधी रोटी थी, जो स्कूल से मिले दोपहर के खाने की बची हुई रोटी थी।”उसने पूछा कि मैंने रोटी कहां से चुराई है। उसने मुझे प्रताड़ित किया, मेरे प्राइवेट पार्ट को लाइटर से जला दिया। वह मुझे पीटता रहा और कहता रहा कि जब तक मैं अपना ‘अपराध’ कबूल नहीं कर लेता, वह मुझे जाने नहीं देगा।”मैं बस घर जाना चाहता था, मैंने झूठ बोल दिया। की मैंने रोटी चुराई है। अब मुझे जाने दो..तभी एक फ्रीजर डंप ट्रक आया और मुझे जबरन अंदर ले जाया गया।
Squid Game or Brothers Home: चोई कहते हैं कि यहीं से उनकी “जेल की जिंदगी” की शुरुआत हुई। वे लगभग 5 साल तक ब्रदर्स होम में रहे। ये केवल चुई की नहीं वहा रहने वाले सेकड़ों लोगों की कहानी है। जिनमें से कुछ का मर्डर कर दिया गया तो कुछ ने आत्महत्या कर ली। ये सब चल ही रहा था की कुछ लोग वहां से भागने में सफल हो गए। उन लोगों ने बाहर जाकर जब वेलफेयर होम्स की सच्चाई बताई तो जांच के आदेश दे दिए गए। ब्रदर्स हॉम्स के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन वहां से बाहर निकले लोगों की जिंदगी आसान नहीं थी। कई लोग अपने परिवार की तलाश में है..जो आज तक पूरी नहीं हुई।