Sprouted Potatoes and Onions: आलू और प्याज भारतीय रसोई के अभिन्न अंग हैं। ये न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि पोषण से भी भरपूर होते हैं। हालांकि, जब ये अंकुरित हो जाते हैं, तो इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। आइए जानते हैं अंकुरित आलू और प्याज के सेवन से जुड़ी सेहत संबंधी जानकारी।
Read More: Nail Biting Habit Health Risks: अगर आपकी भी नाखून चबाने की आदत है तो, ये खबर आपके लिए…
अंकुरित आलू: हानिकारक या लाभकारी?
जब आलू अंकुरित होने लगता है तो उसमें छोटे-छोटे सफेद या हरे रंग के अंकुर (sprouts) निकल आते हैं। यह तब होता है जब आलू को लंबे समय तक नमी और तापमान में रखा जाता है। कई बार इन अंकुरों के साथ-साथ आलू की त्वचा भी हरी हो जाती है। यह हरा रंग क्लोरोफिल के कारण होता है, लेकिन इससे ज्यादा चिंता की बात यह है कि ऐसे आलू में सोलानीन (Solanine) नामक एक विषैला रसायन बनने लगता है।

सोलानीन क्या है?
यह एक ग्लाइकोएल्कलॉइड (glycoalkaloid) यौगिक है, जो प्राकृतिक रूप से आलू के पौधों में पाया जाता है। यह पौधे को कीड़ों और कवक से बचाने का काम करता है, लेकिन इंसानों के लिए यह विषैला हो सकता है। जब आलू अंकुरित या हरा हो जाता है, तो उसमें सोलानीन की मात्रा बढ़ जाती है।
सोलानीन से क्या नुकसान हो सकते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यदि सोलानीन की अधिक मात्रा शरीर में चली जाए, तो यह फूड पॉइज़निंग जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकती है। इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं:
1. मतली और उल्टी।
2. पेट दर्द और दस्त।
3. सिरदर्द, चक्कर आना।
4. में जलन
5. दुर्लभ मामलों में, तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ सकता है
बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह जानलेवा भी हो सकता है, हालांकि ऐसा होना अत्यंत दुर्लभ है।
क्या ऐसे आलू पूरी तरह से फेंक देना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आलू पर हल्के अंकुर हैं और आलू नरम नहीं हुआ है, तो उन अंकुरों को काटकर उपयोग किया जा सकता है। लेकिन यदि:
1. आलू बहुत ज्यादा नरम हो गया है
2. उस पर ज्यादा अंकुर निकल आए हैं
3. या आलू का रंग हरा पड़ गया है
तो उसे खाना उचित नहीं है। विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को ऐसे आलू देने से बचना चाहिए।
अंकुरित प्याज: कितना है सुरक्षित?
अक्सर लोगों को भ्रम होता है कि जैसे अंकुरित आलू हानिकारक होते हैं, वैसे ही प्याज के अंकुर भी नुकसानदायक होंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि अंकुरित प्याज आम तौर पर हानिकारक नहीं होते, जब तक कि वे सड़ने या फफूंदी का शिकार न हो जाएं।

अंकुरित प्याज में क्या होता है?
जब प्याज अंकुरित होता है, तो उसमें से हरे रंग की पत्तियाँ निकलने लगती हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, खासकर तब जब प्याज को गर्म और नम वातावरण में रखा जाए। ऐसे अंकुर पोषण की दृष्टि से हानिकारक नहीं होते, बल्कि इनमें थोड़ी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर हो सकता है।
कब न खाएं अंकुरित प्याज?
1. अगर प्याज में बदबू आने लगे
2. अगर वह अंदर से सड़ने लगे या नरम हो जाए
3. यदि उसमें फफूंदी दिखे
तो ऐसे प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन अगर प्याज केवल अंकुरित हुआ है और वह ताजा है, तो उसे खाने में कोई समस्या नहीं होती।
विशेषज्ञों की राय…
डॉ. मनीषा वर्मा, जो एक वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ हैं, कहती हैं, “अंकुरित आलू को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। हालांकि छोटे अंकुर वाले आलू को सही तरह से छीलकर और पकाकर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन गहरे हरे रंग के या बहुत पुराने आलू का सेवन करने से बचना चाहिए। दूसरी ओर, अंकुरित प्याज खाने से कोई विशेष खतरा नहीं होता।”
वहीं कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुनील चौधरी कहते हैं, “अधिकांश लोग आलू और प्याज को प्लास्टिक की थैलियों में स्टोर करते हैं, जिससे उनमें नमी बढ़ जाती है और अंकुर जल्दी निकलने लगते हैं। इन्हें सूखी, ठंडी और हवादार जगह पर रखना चाहिए।”
स्टोरेज से जुड़ी सलाह…
1. आलू और प्याज को एक साथ न रखें: दोनों से गैस निकलती है जो एक-दूसरे को जल्दी अंकुरित कर सकती है।
2. धूप से बचाएं: सूरज की रोशनी से आलू हरा पड़ सकता है और सोलानीन की मात्रा बढ़ सकती है।
3. पेपर बैग या जूट की बोरियों का इस्तेमाल करें: इससे हवा का संचार होता रहेगा और नमी कम होगी।
4. फ्रिज में न रखें: आलू को फ्रिज में रखने से उसका स्टार्च चीनी में बदल जाता है, जिससे उसका स्वाद और पोषण प्रभावित होता है।
