sonia gandhi india silence on israel iran war: भारत की चुप्पी खतरनाक, अभी देर नहीं हुई” – सोनिया गांधी !
sonia gandhi india silence on israel iran war: ईरान पर इजराइली हवाई हमलों और भारत सरकार की “चुप्पी” पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अखबार ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने आर्टिकल में न सिर्फ इजराइल की कार्रवाई को क्रूर और गैरकानूनी बताया, बल्कि भारत की नैतिक चुप्पी को भी उसकी ऐतिहासिक कूटनीति से विचलन करार दिया।
📍 1. इजराइल का ‘एकतरफा और क्रूर’ हमला
सोनिया गांधी के मुताबिक, 13 जून को इजराइल ने ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए हमला किया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और क्षेत्रीय अस्थिरता को जन्म देने वाला कदम है।
“गाजा की तरह यह हमला भी आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। यह कार्रवाई शांति को नहीं, बल्कि संघर्ष को आगे बढ़ा रही है।” – सोनिया गांधी
उन्होंने कहा कि यह हमला उस समय हुआ जब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में जा रही थी, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बन रही थी।
📍 2. नेतन्याहू की सरकार पर बड़ा हमला
सोनिया ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा:
“नेतन्याहू की लीडरशिप में शांति की जगह कट्टरता और अवैध कब्जों को बढ़ावा मिला है। वे टू-स्टेट सॉल्यूशन को भी खारिज कर रहे हैं।”
इतिहास की ओर इशारा करते हुए उन्होंने 1995 में इजराइल के पूर्व PM राबिन की हत्या को भी नेतन्याहू की उकसावे वाली राजनीति का नतीजा बताया।
📍 3. अमेरिका और ट्रम्प पर भी निशाना
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर भी सोनिया गांधी ने हमला बोला। उन्होंने कहा कि ट्रम्प अपनी ही खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट को नकार कर यह कह रहे हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब है—जबकि हकीकत ये है कि:
- ईरान ने 2003 में परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोक दिया था
- सुप्रीम लीडर खामेनेई ने इसे फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी
“ट्रम्प का रुख न सिर्फ अफसोसनाक है, बल्कि इस क्षेत्र में युद्ध की आग को और भड़काने वाला भी है।”
📍 4. इजराइल का दोहरा मापदंड
सोनिया गांधी ने इजराइल को उसके दोहरे मापदंड के लिए घेरा। उन्होंने कहा:
- इजराइल खुद एक परमाणु शक्ति है
- ईरान NPT (न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी) का हिस्सा है
- 2015 का समझौता ईरान ने निभाया, लेकिन अमेरिका ने 2018 में उसे छोड़ दिया
“यह दोहरापन किसी भी लोकतांत्रिक और न्यायप्रिय राष्ट्र के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।”
📍 5. भारत को बोलना चाहिए – “अभी भी देर नहीं हुई”
भारत की चुप्पी पर उन्होंने चिंता जताई और कहा:
“भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। ईरान ने 1994 में यूएन में कश्मीर पर भारत का समर्थन किया था। अब भारत को भी आवाज उठानी चाहिए।”
उन्होंने साफ कहा कि भारत को एक नैतिक राष्ट्र के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। “अभी भी देर नहीं हुई है, भारत को स्पष्ट और मजबूत संदेश देना चाहिए।”
भारत के लिए चेतावनी
ईरान पर प्रतिबंध और इजराइल के साथ हथियार डील दोनों ही भारत की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित करते हैं।
- चाबहार पोर्ट, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स धीमे पड़े हैं
- भारत के लिए अब संतुलन बनाए रखना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है
📢 भारत अपने पुराने दोस्त ईरान के साथ खड़ा होगा
सोनिया गांधी का यह बयान भारत की विदेश नीति को आईना दिखाता है। ऐसे समय में जब पूरा क्षेत्र तनाव में है, भारत की भूमिका और आवाज निर्णायक हो सकती है।
क्या भारत अपने पुराने दोस्त ईरान के साथ खड़ा होगा, या चुप्पी की कूटनीति ही अपनाएगा? यह आने वाला वक्त बताएगा।
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