भारत के इतिहास में कुछ ऐसे बजट हैं जिन्हे हमेशा याद किया जाएगा जिनकी खूबियों और खामियों की वजह से उनकी आज भी चर्चा होती है। आज ऐसे ही कुछ चर्चित बजट के बारे में जानेंगे.
सदी मे एक बार बजट
famous budgets: इसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2021 में पेश किया था इसे 100 सालों में एक बार आने वाला बजट कहा जाता है। इसमें निजीकरण, टैक्स प्रावधानों, इंफ्रास्ट्रकचर और स्वास्थ्य आदि को लेकर कई अहम ऐलान किए गए थे और कोविड काल के बाद अर्थव्यवस्था को एक बूस्टर की अवश्यकता थे जो देश के विकास की गाड़ी को दौड़ा सके और यही काम इस बजट ने बखूबी किया l
मिलनेयम बजट
famous budgets: ये 21वीं सदी का पहला बजट था और इसे तत्कालीन अटल बिहारी की सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पेश किया था। साल 2000 के इस बजट को मिलेनियम बजट नाम से जाना गया जिसने आईटी सेक्टर को टैक्स में छूट दी और कंप्यूटर सहित 21 आईटी उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई। जिसका परिणाम यह हुआ कि देश के आईटी सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव देखे गये. साथ ही यशवंत सिन्हा ने बजट को शाम के पांच बजे पेश करने वाली अंग्रेजों से जुड़ी सालों पुरानी परंपरा को भी तोड़ा और सुबह 11 बजे इस बजट को पेश किया गया।
युगांतकारी बजट
famous budgets: साल 1991 में भारत आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और भारत को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ‘युगांतकारी बजट’ लेकर आई। जिसको आकार तत्कालीन वित्त मंत्री और देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दिया था। इस ऐतिहासिक बजट ने लाइसेंस राज देश मे समाप्त कर दिया और भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि भारत में विदेशी पूंजी के निवेश को रास्ता मिल गया और देश के विकास को काफी बल मिला और इस बजट ने भारत की किस्मत बदल दी इसलिए इसे एपोकल यानी युगांतकारी कहा गया।
कैरट एंड स्टिक बजट
famous budgets: 28 फरवरी 1986 को वीपी सिंह ने कांग्रेस सरकार के लिए केंद्रीय बजट पेश किया और यह बजट लाइसेंस राज को खत्म करने की दिशा में एक ठोस कदम माना गया l इसे ‘कैरेट एंड स्टिक’ बजट कहा गयाऔर यह एक तरह का मुहावरा है, जिसमें कैरेट यानी गाजर को मिठास या ईनाम के तौर पर माना गया है तो वहीं, स्टिक यानी की छड़ी को कड़े निर्णय के तौर पर देखा जाता है।
