नकली शराब परमिट मामला: नकली शराब परिवहन परमिट और अवैध ढुलाई के गंभीर मामले में आबकारी विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टलरीज समूह की दोनों इकाइयों के सभी लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं,। यह कार्रवाई लंबे कानूनी मंथन और महाधिवक्ता के अभिमत के बाद की गई।
नकली शराब परमिट मामला: ये लाइसेंस हुए सस्पेंड
आबकारी आयुक्त के आदेश के मुताबिक, सेहतगंज, जिला रायसेन स्थित मेसर्स सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड के डी-1, एफएल-1, सीएस-1 और सीएस-1बी लाइसेंस निलंबित किए गए हैं. वहीं रोजराचक, जिला रायसेन स्थित मेसर्स सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड के एफएल-9 और एफएल-9ए (ऑफ बी-3) लाइसेंस पर भी रोक लगा दी गई है।
नकली शराब परमिट मामला: महाधिवक्ता के अभिमत के बाद कार्रवाई
लाइसेंस निलंबन को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए आबकारी आयुक्त ने पहले अतिरिक्त महाधिवक्ता, ग्वालियर से अभिमत मांगा, फिर जबलपुर हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता को पत्र लिखा। कई अनुस्मारक पत्रों के बाद 24 दिसंबर 2025 को महाधिवक्ता, उच्च न्यायालय जबलपुर से स्पष्ट अभिमत मिला कि दोनों इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं। इकाइयों की ओर से दिए गए जवाब और उच्च न्यायालय के आदेशों की अद्यतन स्थिति देखने के बाद विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि केवल सजा पर रोक है, लाइसेंस पर नहीं। इसके बाद निलंबन का आदेश जारी किया गया।
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विभागीय अमले पर भी गिरी गाज
इस मामले में सिर्फ कंपनी ही नहीं, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई है. आबकारी उप निरीक्षक प्रीति गायकवाड़ को 25 सितंबर 2025 को सेवा से पदच्युत किया जा चुका है. जबकि सेवानिवृत्त और अन्य अधिकारियों मदन सिंह पवार, कैलाश चंद्र बंगाली, रामप्रसाद मिश्रा सहितके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं।
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जाने कैसे रची गई साजिश
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने परमिट क्रमांक 10363, ट्रक नंबर एमपी 09 एचएफ 5185 की बिल्टी सहित कई परमिट बुक कूटरचित तरीके से तैयार कीं। रिकॉर्ड के मुताबिक, अलग-अलग अधिकारियों और कर्मचारियों ने सैकड़ों फर्जी परमिट बनाए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सोम डिस्टलरीज की रोजराचक यूनिट से दीव तक शराब का अवैध परिवहन किया गया.यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है.अब निगाहें इस पर हैं कि आगे कोर्ट और विभागीय स्तर पर इस प्रकरण में और क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।
