social boards caste appease: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तमाम जातियों को साधने के लिए सामाजिक बोर्ड का गठन करके नेताओं को मंत्री का दर्जा दिया था। चुनावों में इन नेताओं ने अपनी जातियों के वोट बीजेपी को दिलाए और सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन, सरकार ने इन बोर्ड को दो साल में बजट के नाम पर ठेंगा दिखाया।
9 समाजों के बोर्डों पर शून्य खर्च
विभिन्न समाजों के कल्याण के लिए बनाए गए 9 समाज कल्याण बोर्डों को सरकार ने दो साल में एक रुपया भी नहीं दिया। 8.34 करोड़ रुपए आवंटित होने के बावजूद किसी भी बोर्ड को राशि जारी नहीं की गईजिसके कारण किसी भी समाज का एक भी व्यक्ति लाभान्वित नहीं हुआ। यह जानकारी तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न क्रमांक 111 के जवाब में दी। सरकार ने अक्टूबर 2023 में दो साल के लिए ये बोर्ड बनाए थे और 17 सितंबर 2025 को बिना किसी समीक्षा के सभी बोर्ड भंग कर दिए।
social boards caste appease: बोर्ड के नाम पर गुमराह किया
विधायक प्रताप गेव्राल ने कहा, कि मंत्री के जवाब से स्पष्ट है कि समाज को गुमराह करने के लिए बोर्ड बनाए गए थे कि जो भाजपा के अध्यक्ष है उनको तो सुविधाएं मिल रही है जैसे कि वाहन, मानदेय, ग्रह-भत्ता सुविधा दी जा रही है और बोर्ड की तरफ से एक रूपए का उपयोग नही हुआ, बेरोजगारो और हितग्राहियों के लिए न कोई योजना बनी , कोई चयन नही
महाराणा प्रताप बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति ही नहीं की गई, फिर बोर्ड भंग कर दिया गया। तेलघानी और जय मीनेष बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई। रजक और वीर तेजाजी बोर्ड में चार के स्थान पर सिर्फ एक–एक सदस्य नियुक्त किया गया।
