social activist statement Naxalism : बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी ने तेलगांना में प्रेस कॉन्फेस की इस दौरान सोनी ने कहा, कि नक्सलवाद कभी खत्म नही होगा नक्सलवाद की समस्या केवल हथियार और हिंसा की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक-आर्थिक असमानता और अन्य गंभीर मुद्दे हैं।
सरेंडर से पहले आदिवासियों से क्यों नहीं पूछा?
सोनी सोढ़ी ने सवाल उठाया कि नक्सलियों के बड़े नेता भूपति और रूपेश ने आत्मसमर्पण से पहले आदिवासी समाज से कोई सलाह क्यों नहीं ली। इससे उनकी नैतिकता और मंशा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आदिवासी समुदाय के हित में होनी चाहिए थी।
गृहमंत्री का बयान
मध्यप्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों के सरेंडर पर कहा कि कुछ लोग माहौल खराब करने के लिए विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सोनी सोढ़ी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह तेलंगाना में माओवादियों की श्रद्धांजलि सभा में गयी थीं जहां उन्होंने नक्सलियों को जायज ठहराने की कोशिश की, जो सही नहीं है।
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सरकार की बदलती रणनीति
सरकार ने अब नक्सलवाद से निपटने की रणनीति में बदलाव किया है। पहले जहां एनकाउंटर प्रमुख था, अब आत्मसमर्पण और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे अबतक 650 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और पुलिस ने कई नक्सलियों को या तो हिरासत में लिया है या मारा है।
नक्सलवाद का जल्द होगा सफाया
नक्सलवाद खत्म करना एक दीर्घकालीन और जटिल प्रक्रिया है जिसमे सामाजिक-आर्थिक सुधार की जरूरत है। सोनी सोढ़ी के विचार और गृह मंत्री के बयान इस समस्या के दो पहलुओं को दर्शाते हैं। सरकार की बदलती रणनीति और आदिवासियों की भागीदारी से ही सच्चे समाधान की उम्मीद की जा सकती है।
