Snake Worships Lord Shiva: शिवभक्तों के लिए यह खबर किसी चमत्कार से कम नहीं—आगरा जिले के सलेमाबाद गांव में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर में बीते 15 वर्षों से रोजाना एक नाग आता है और भगवान शिव की पूजा करता है। यह नाग हर दिन निश्चित समय पर मंदिर में आता है, करीब 10 बजे, और शिवलिंग के पास 5 घंटे तक शांत बैठा रहता है। यह रहस्य आज भी विज्ञान की समझ से परे है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विषय बन चुका है।
नाग ही करता है शिवलिंग की पूजा…
माना जाता है कि शिवजी को नाग देवता प्रिय हैं, लेकिन सलेमाबाद का यह मंदिर इस मान्यता को एक नया आयाम देता है। यहां इंसानों से ज्यादा एक नाग की पूजा को महत्व दिया जाता है। मंदिर में नाग के आने के बाद, द्वार बंद कर दिए जाते हैं, और तब तक किसी को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया जाता जब तक वह नाग वापस न चला जाए। इसके बावजूद, लोग मंदिर के बाहर खड़े रहकर इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने को लालायित रहते हैं।
15 सालों से एक जैसे समय पर आता है नाग…
स्थानीय पुजारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यह नाग बीते 15 वर्षों से बिना नागा किए रोज सुबह 10 बजे आता है और दोपहर 3 बजे के बाद चला जाता है। शिवलिंग के पास बैठे इस नाग ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है। यहां तक कि जब मंदिर में भीड़ भी होती है, तब भी वह पूरी तरह शांत और अहिंसक रहता है। यही वजह है कि इस नाग को लोग शिव का रूप मानते हैं।

चमत्कार या शिव की कृपा?
इस नाग के नियमित आगमन को लेकर गांव में कई तरह की मान्यताएं हैं। कुछ लोग मानते हैं कि यह शिवजी की कृपा है, तो कुछ इसे कोई चमत्कार या प्रकृति का रहस्य मानते हैं। विज्ञान भले ही इस रहस्य को समझने में असमर्थ हो, लेकिन स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर और नाग, श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बन चुके हैं।
मंदिर में उमड़ती है भीड़…
सावन और महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसरों पर इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वे नाग के दर्शन को भी पुण्यदायक मानते हैं। मंदिर को एक जागृत स्थल माना जाता है, जहां हर रोज किसी न किसी को चमत्कारी अनुभव होते हैं। श्रद्धालु बताते हैं कि नाग को देखते ही उनके मन में एक अद्भुत शांति का अनुभव होता है।
मंदिर प्रशासन की भूमिका…
मंदिर के पुजारियों ने नाग को कभी भगाने या हटाने की कोशिश नहीं की। वे भी इसे ईश्वरीय इच्छा मानते हैं और उसी श्रद्धा से मंदिर के नियमों का पालन करते हैं। नाग के आने और जाने का समय इतना निश्चित है कि मंदिर के सभी कार्य उसी के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं।
