ट्रंप जानबूझकर भारत को बना रहा निशाना
ट्रंप 2.0 के दौरान अमेरिका ने जान बूझकर भारत को निशाना बनाया, 50% का टैरिफ लगाया, आतंकवादियों के समर्थक पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर को गले लगाया और दक्षिण एशिया में भारत का कई बार ‘अपमान’ करते हुए पाकिस्तान को प्राथमिकता दी।

साम, दाम, दंड, भेद की नीति
Why Trump is Targeting India: डोनाल्ड ट्रंप, देशों की संप्रभुता में यकीन नहीं रखते, वो अपने राजनीतिक और आर्थिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपना रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप शक्तियों के बंटवारे, नियंत्रण और संतुलन के सिद्धांतों का सम्मान नहीं करते, जो अमेरिकी संविधान के सिद्धांत हैं।
लोकप्रिय लोग ट्रंप के लिए खतरा
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप दूसरे देशों की ऐसी हस्तियों को अपने ग्लोबल वर्चस्व के लिए खतरा समझते हैं, जो अपने क्षेत्रों में ज्यादा ताकतवर हैं। उन्हें लगता है कि ऐसे नेताओं के रहते वो अपने अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकेंगे, इसीलिए ऐसे नेता उनके लिए खतरा हो सकते है। चीन के शी जिनपिंग और रूस के व्लादिमीर पुतिन को ट्रंप कंट्रोल नहीं कर सकते। लेकिन ट्रंप को लगता है कि वो भारत को आसानी से कंट्रोल कर सकते है।
मोदी, ट्रंप से ज्यादा फेमस
मोदी, ट्रंप से ज्यादा फेमस रहे हैं, इसीलिए वो भारत को कमजोर बताने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ बताते हैं। ट्रंप का सोचना है कि भारत कई मामलों में अमेरिका पर निर्भर है। क्योंकि काफी सारी वस्तुएं भारत अमेरिका से आयात-नियात करता है।

Why Trump is Targeting India: दिक्कत में अमेरिका
अमेरिका चाहे अपने आप को बहुत ताकतवर दिखाता हो लेकिन अमेरिका अभी काभी दिक्कतों का सामना कर रहा है।
अमेरिका की वर्तमान आर्थिक समस्याएं
- अमेरिका वर्तमान में 4 बड़ी समस्याओं का सामना कर रहा है। 38.5 ट्रिलियन डॉलर का भारी कर्ज, Inflation, डॉलर का रिजर्व करेंसी के रूप में कमजोर होना, और चीन की चुनौती।
- अमेरिका का वार्षिक घाटा लगभग 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें से लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर केवल ब्याज चुकाने में जाता है।
- अमेरिका में महंगाई बढ़ रही है। जिसे कम करना जरूरी है, क्योंकि यदि ब्याज दरें 1% भी गिरती हैं, तो इससे अमेरिका के 300 बिलियन डॉलर बच सकते हैं।

पेट्रोडॉलर और डॉलर का दबदबा
अमेरिका की असली ताकत उसका डॉलर है, जो वैश्विक रिजर्व करेंसी है। दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार क्रूड ‘ऑयल’ डॉलर में होता है, जिसे पेट्रोडॉलर कहा जाता है।
इतिहास में जब भी किसी देश जैसे इराक या लीबिया ने अपनी मुद्रा में तेल बेचने की कोशिश की, अमेरिका ने उन पर कार्रवाई की।
2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका ने रूस के 420 बिलियन डॉलर के फॉरेक्स रिजर्व को फ्रीज कर दिया, जिससे दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई।
De-dollarization और गोल्ड का उदय
रूस पर लगे बैन के बाद भारत और चीन जैसे देशों ने अपने डॉलर रिजर्व को कम करना और सोना खरीदना शुरू कर दिया है।
इतिहास में पहली बार वैश्विक बैंकों के गोल्ड रिजर्व, उनके पास मौजूद अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स से अधिक हो गए हैं।
Why Trump is Targeting India: सेमीकंडक्टर्स और AI
आने वाला समय AI, सेमीकंडक्टर्स (चिप्स), और EV का है। चिप्स के बिना कोई भी इलेक्ट्रॉनिक्स या AI काम नहीं कर सकता।
अभी चीन का TSMC (ताइवान) जैसी कंपनियों के माध्यम से इस क्षेत्र पर बड़ा नियंत्रण है।
AI को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। चीन के पास सस्ती बिजली और रेयर अर्थ मेटल्स का बड़ा भंडार है, जो उसे बढ़त दिलाता है।
वेनेजुएला और साइबर युद्ध
Why Trump is Targeting India: वेनेजुएला के तेल और रेयर अर्थ मिनरल्स पर नियंत्रण पाने के लिए अमेरिका ने ‘साइबर वार’ का सहारा लिया। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने ऐसी तकनीक (साउंड वेव्स और मालवेयर) का इस्तेमाल किया जिससे बिना गोली चलाए वहां के सिस्टम को ठप कर दिया गया।
भारत की स्थिति
भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरी बन सकता है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा जनसंख्या और Consumption है। हालाँकि, भारत में Innovation और R&D की कमी है। भारत अभी भी एक ‘सर्विस इकॉनमी’ है, जबकि उसे ‘प्रोडक्ट इकॉनमी’ बनने की जरूरत है। IT कंपनियोंका भविष्य AI और Cloud डेटा सेंटर्स में निवेश पर निर्भर है।
