SIR controversy Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश में SIR को लेकर सियासत गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पहल को चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जनता को डराने और विपक्षी वोटों को प्रभावित करने की साजिश है। वहीं, बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस जानबूझकर फर्जी वोटिंग को संरक्षण दे रही है और विदेशी नागरिकों के वोटों से चुनाव जीतने की साजिश रच रही है।
लोकतंत्र में डर पैदा कर रही बीजेपी- कांग्रेस
जीतू पटवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्ष के मतदाताओं को दबाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रशासनिक स्तर पर बीजेपी समर्थित अधिकारी मतदाता सूची में गड़बड़ी कर रहे हैं।
प्रदेशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को धमकाया जा रहा है वे बूथ स्तर पर निगरानी न कर सकें। पटवारी ने यह भी जोड़ा कि यह “डर का मॉडल” लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस पर तत्काल कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
कांग्रेस बना रही है झूठा नैरेटिव-बीजेपी
भाजपा प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदान सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, न कि किसी को डराना।
कांग्रेस विदेशी नागरिकों के वोटों से चुनाव जीतना चाहती है। पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मूल के लोगों के फर्जी नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराए गए हैं, जिनकी पहचान अब खुल रही है। इसी वजह से कांग्रेस बौखला गई है।
चुनाव आयोग पर उठे सवाल
SIR प्रक्रिया में मतदाताओं की पहचान के लिए घर-घर सर्वे किया जा रहा है। आयोग का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है जिससे फर्जी वोटरों को हटाया जा सके।
हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह सर्वे केवल विपक्षी गढ़ों में किया जा रहा है, जबकि बीजेपी समर्थक क्षेत्रों में इसे औपचारिकता के रूप में निपटाया जा रहा है।
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सियासी माहौल में बढ़ी बयानबाजी
SIR विवाद ने चुनाव पूर्व राज्य की राजनीति को और तीखा बना दिया है। दोनों दल एक-दूसरे पर चुनाव को प्रभावित करने के आरोप लगा रहे हैं।
कांग्रेस ने कहा कि यदि इस प्रक्रिया को तुरंत रोका नहीं गया तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। वहीं, बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस को ईमानदार चुनाव प्रक्रिया से डर लग रहा है।
SIR पर बढ़ता विवाद
SIR विवाद का असर चुनाव पर पड़ेगा। यह मुद्दा मतदाताओं की भावना और विश्वास को प्रभावित कर सकता है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, कांग्रेस इसे “लोकतांत्रिक डर” के मुद्दे के रूप में उछाल रही है जबकि बीजेपी इसे “फर्जी वोटर हटाओ” मुहिम के रूप में पेश कर रही है।
