विकास के दावों की खुली पोल
Singrauli healthcare crisis: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले से एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है जो सरकार के विकास के दावों को कटघरे में खड़ा कर देती है। यहां सड़क न होने की वजह से गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर परिजनों ने कीचड़ भरे पगडंडियों और जंगलों के रास्ते से अस्पताल पहुंचाया। घटना चितरंगी ब्लॉक के धानी ग्राम पंचायत की है… जहां गुल्लू कोल नाम की महिला को प्रसव पीड़ा होने पर खाट के सहारे कई किलोमीटर तक पैदल अस्पताल ले जाया गया।
खाट बनी जीवन रक्षक डोली
धानी पंचायत क्षेत्र पूरी तरह पहाड़ और जंगल से घिरा हुआ है, जहां सड़कों का नामोनिशान नहीं है। यहां के आदिवासी परिवार अब भी खटिया को ही एंबुलेंस मानते हैं। गांव में एंबुलेंस आना तो दूर रास्ता ही इतना खराब है कि पैदल चलना भी जोखिम भरा है। गंभीर बीमारियों या प्रसव जैसी स्थितियों में ग्रामीण डोली के जरिए मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने को मजबूर हैं।
आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित
गांव वालों का आरोप है कि हर चुनाव में नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं… लेकिन जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता। आज़ादी के 75 साल बाद भी गांव में न सड़क है न बिजली और न ही पानी की पुख्ता व्यवस्था। सरकारी दावे और योजनाएं कागज़ों तक ही सीमित हैं… ज़मीनी हकीकत अब भी बेहद भयावह है।
वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप
Singrauli healthcare crisis: बतादें कि इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.. जिससे प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यही है विकसित भारत का सच? क्या आदिवासी इलाकों में इंसानी जान की कोई कीमत नहीं? ऐसे सवालों के बीच अब जरूरत है सिर्फ घोषणाएं नहीं ज़मीनी स्तर पर ठोस काम की।
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सऊद पठान,संवाददाता,सिंगरौली
