Sindh River flood: दतिया जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सिंध नदी को उफान पर ला दिया है, जिससे नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। इसके चलते कोटरा, ढिमरपुरा, पाली, मेढ़पुरा सहित नदी किनारे बसे कई ग्रामीण इलाकों में बाढ़ जैसा हालात पैदा हो गया है स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर इन प्रभावित गांवों का तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया।

Sindh River flood: संपर्क टूट गया एवं व्यापक परेशानी खड़ी हो गई
जिला कलेक्टर स्वप्ननिल वानखेड़े स्वयं राहत कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल हुए। उन्होंने कोटरा गांव का दौरा किया और वहां निवासरत लोगों को मोटर बोट से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया । प्रशासन की ओर से NDRF, SDRF, और सेना की टीमें भी तैनात की गईं, जिन्होंने पहाड़ा और शिवपुरी समेत अन्य जिलों से आपातकालीन बचाव कार्य संचालित किए… कई गांवों में नजदीकी पुल भी जल प्रवाह की गति से बह गए, जिससे संपर्क टूट गया एवं व्यापक परेशानी खड़ी हो गई…
Sindh River flood: अहमियत को भी उजागर कर रहे
वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे NDRF की बोट बचाव में इस्तेमाल की गई, लोग नाव के जरिए सुरक्षित जगहों तक पहुंचाए जा रहे हैं, जबकि आसपास का इलाका धुएं की तरह पानी से घिरा हुआ था….ये दृश्य न केवल प्रशासनिक तत्परता की गवाही दे रहे हैं बल्कि स्थानीय समुदाय में सुरक्षा और जागरूकता की अहमियत को भी उजागर कर रहे हैं।
Sindh River flood: सीमांत और वयस्क सभी का समावेश था
मुख्यमंत्री की मॉनिटरिंग में राज्य स्तरीय स्थिति समीक्षा की गई और रक्षा मंत्रालय से भी सहायता मांगी गई। एयर फ़ोर्स की हेलिकॉप्टरों द्वारा कटे क्षेत्र से फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जिसमें सीमांत और वयस्क सभी का समावेश था…
Sindh River flood: ध्यान न दें और ध्यान से सुरक्षित स्थानों पर जाएं
राहत और बचाव कार्य में अब तक कई गांवों को खाली कराया जा चुका है। प्रशासन ने लोगों को फ़ूड, पानी, दवाई और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करते हुए कहा है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और ध्यान से सुरक्षित स्थानों पर जाएं…
Sindh River flood: हरेक अपडेट पर नजर बनाए हुए
विशेष रूप से, 2021 की भीषण बाढ़ की यादें ग्रामीणों में फिर ताजा हो गई हैं; तब कई गांव तबाह हो गए थे और अभी तक लोग पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं । इस बार प्रशासन की सतर्कता के चलते बड़ा नुकसान टल गया, मगर ग्रामीण अब भी चिंतित हैं और हरेक अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।
