सरला भट्ट केस में Yasin Malik के घर समेत 8 जगह छापे!
18 अप्रैल 1990 की रात को, श्रीनगर के SKIMS हॉस्टल से 27‑साल की नर्स सरला भट्ट का अपहरण हुआ।
अगली सुबह, उनके लाश मिली गोली और यातना के निशानों से भरी एक नकली ‘पुलिस सूचना देने वाली’ नोट उनकी गर्दन से लिपटा हुआ था; एक बयान कि उस कदर डराना था कि कश्मीरी पंडितों को वहां से भागना पड़े।
उस वक्त मामला निगीन पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ लेकिन शायद समय और सावन ने सब कुछ खो दिया। 35 साल बाद, अब SIA ने यह केस फिर खोलने का फैसला किया है। आज सुबह 8 जगहों पर छापेमारी हुई जिनमें Yasin Malik का घर भी शामिल है, साथ ही अन्य JKLF से जुड़े पूर्व कमांडरों की जगहें भी
समय ने बदला लेकिन इंतज़ार अब भी वैसा ही है
सोचिए एक महिला जिसका सिर्फ एक खामोश संघर्ष था, जिसकी हिम्मत ने उसे सबके पीछे खड़ा किया था… लेकिन अंधेरा उसकी यादों पर इतना गहरा था कि ज्योति भी ढंक गई। और फिर एक दिन… कदमकदम पर, आरोपशिकायत पर, धूलकी तह में, कहीं उम्मीद बंधी रहने लगी।
आज जब SIA की टीम स्कूलों और घास के बीच से नहीं, बल्कि तीखे सवालों और पुराने दस्तावेजों से बरामद साक्ष्यों की तलाश में है तो लगता है जैसे इतिहास का एक हिस्सा आखिरकार कानूनी ओर से सुनने के लिए जाग रहा है।
सवाल अब वहीं ठहरते हैं
क्या इस छापेमारी से खुलकर सच सामने आएगा? क्या हम अब भी उन लोगों को न्याय दिला पाएंगे, जो वर्षों से इंतज़ार करते रहे?
क्या ऐसे कदम से कश्मीरी पंडित समुदाय को वास्तविक आश्वासन मिलेगा कि उनका दर्द देखा गया… और सुनवाई हो रही है?
सरला भट्ट की तस्वीर याद दिलाती है कि न्याय कभी देर से मिलना, न्याय का अंत नहीं होता। हम शायद यह नहीं जान पाएंगे कि 35 साल तक क्या गुज़री होगी उस परिवार पर; लेकिन आज की यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि यादें, दर्द, और हम सभी के लिए मानवता समय के बाद भी गूंज सकती है।
Read More:- पाकिस्तान की नई साजिश: गैस, पानी बंद कर भारतीय डिप्लोमैट्स पर दबाव
Watch Now :- #madhyapradesh 4 सालों में हुए 58 हजार से ज्यादा बच्चे गायब!
