shubhanshu shukla space mission: जानिए कैसे एक बच्चे की तरह सीख रहे हैं अंतरिक्ष में खाने और चलने के बारे में!
shubhanshu shukla space mission: भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला, जो 25 जून को अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे, आज, 26 जून को दोपहर 3:48 बजे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचेंगे। यह मिशन पहले छह बार तकनीकी और मौसम संबंधी कारणों से टल चुका था, लेकिन अंततः वह और उनके साथियों ने 28 घंटे की यात्रा के बाद ISS को सफलतापूर्वक डॉक किया।
शुभांशु ने स्पेसक्राफ्ट से लाइव बातचीत करते हुए कहा, “नमस्कार फ्रॉम स्पेस! मैं और मेरे साथी अंतरिक्ष यात्री यहां होने के लिए बहुत उत्साहित हैं।”
आश्चर्यजनक अनुभव
शुभांशु ने अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए कहा, “जब हम वैक्यूम में लॉन्च हुए, तो मुझे बहुत अच्छा नहीं लग रहा था। मैं बहुत सो रहा था। लेकिन अब मैं यहां नए वातावरण में धीरे-धीरे ढल रहा हूं। यह बिल्कुल एक बच्चे की तरह है, जैसे हम चलने, खाने और अन्य चीजें सीखते हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि अंतरिक्ष में चलना और खाना एक बहुत ही अलग अनुभव है और उन्होंने कहा, “यह एक नया वातावरण है और बहुत सारी नई चुनौतियां हैं। मैं यहां का हर पल एन्जॉय कर रहा हूं।”
वैक्यूम में तैरना
“जब हमें वैक्यूम में लॉन्च किया गया, तब मुझे ऐसा लगा जैसे सीट में पीछे धकेला जा रहा हो,” शुभांशु ने कहा। “यह यात्रा बहुत ही अद्भुत थी और फिर अचानक सब कुछ शांत हो गया। बेल्ट खोलने के बाद हम वैक्यूम की शांति में तैर रहे थे।”
समूह की सफलता
शुभांशु ने मिशन को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक, एक सामूहिक सफलता बताया और अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों, परिवार और दोस्तों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “यह सब आप सभी की वजह से संभव हुआ है। मैं दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं।”
भारतीय संस्कृति से जुड़ा एक प्रतीक
शुभांशु ने हंस को भारतीय संस्कृति में बुद्धिमत्ता का प्रतीक बताया और कहा, “हमने आपको जोय और ग्रेस दिखाए। यह हंस का प्रतीक हमारे लिए बहुत मायने रखता है। हंस का महत्व पोलैंड, हंगरी और भारत में समान रूप से है।”
अंतरिक्ष में जीवन का आनंद ले रहे हैं
शुभांशु ने अपनी बातचीत में यह भी साझा किया कि वह अंतरिक्ष में बिताए गए समय का पूरा आनंद ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “यहां ऊपर बहुत मजेदार समय बिता रहा हूं। कभी-कभी गलतियां करना ठीक है, लेकिन दूसरों को गलतियां करते देखना और भी मजेदार है।”
मिशन की लॉन्चिंग पर भावुक परिवार
अंतरिक्ष में जाने के पहले शुभांशु के माता-पिता, आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला, लखनऊ में एक्सियम मिशन-4 की लॉन्चिंग का उत्साह से पालन कर रहे थे। लॉन्च होते समय उनके चेहरे पर भावुकता और खुशी साफ दिख रही थी। मिशन के सफल टेकऑफ पर दोनों ने ताली बजाकर अपनी खुशी व्यक्त की।
मिशन की शुरुआत और सुरक्षा
25 जून को दोपहर करीब 12 बजे, एक्सियम मिशन-4 के क्रू ने स्पेसक्राफ्ट से अपनी यात्रा शुरू की थी। लॉन्च के करीब 10 मिनट बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट फाल्कन-9 रॉकेट से अलग हो गया था, और फिर लगभग 28.5 घंटे के बाद 26 जून को ये एस्ट्रोनॉट्स ISS तक पहुंचे।
अंतरिक्ष की लाइव तस्वीरें
मिशन के दौरान खींची गई ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की लाइव तस्वीरों में, आप देख सकते हैं कि यह स्पेसक्राफ्ट कितनी खूबसूरती से ISS तक पहुंच रहा था। एक बार जब क्रू डॉक कर चुका था, तो सभी एस्ट्रोनॉट्स ने मिलकर इस ऐतिहासिक यात्रा को सफल बनाने का जश्न मनाया।
शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष में यह अनुभव भारतीय अंतरिक्ष मिशनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उनके अनुभव ने न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की प्रगति को प्रदर्शित किया है, बल्कि यह हमें यह भी दिखाता है कि अंतरिक्ष में जीवन कितना चुनौतीपूर्ण और रोमांचक हो सकता है। हम शुभांशु और उनके साथियों की सफलता की कामना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इस मिशन से उन्हें और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को नए-नए अनुभव मिलेंगे।


