Shivpuri Food Poisoning: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस तहसील के मोहराई गांव में गणेश उत्सव के अवसर पर आयोजित भंडारे में हलवा प्रसाद के रूप में परोसा गया। लेकिन यह हलवा किसी आशीर्वाद से कम और जहर से ज़्यादा साबित हुआ।हलवा खाने के बाद करीब 250 ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई, जिसमें उल्टी और दस्त के लक्षण पाए गए। कुछ की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
प्रसाद में बंटा नकली घी से बना हलवा
दरअसल, शिवपुरी जिले की कोलारस तहसील के मोहराई गांव में भंडारे में देसी घी से बना हुआ हलवा प्रसाद के रूप में परोसा गया. जिस घी में प्रसाद बना था उसका डिब्बा सामने आया. घी के इस डिब्बे पर साफ तौर पर लिखा है कि ये घी इंसानों के खाने के योग्य नहीं है. इसके बावजूद इस घी से हलवा बनाकर परोसा गया.
250 से ज्यादा लोग बीमार
हलवा खाने के बाद करीब 250 ग्रामीण बीमार पड़ गए. सभी मरीजों में उल्टी-दस्त की शिकायत सामने आई. हालांकि कुछ लोगों की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. इधर, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पीड़ितों का इलाज करना शुरू किया.
रात को मचा कोहराम, आधे घंटे में बिगड़ी हालत
जानकारी के मुताबिक, रविवार की रात गणेश उत्सव के दौरान एक भंडारे में यह नकली घी से बना हुआ हलवा प्रसाद के रूप में परोसा गया था. भंडारे के आधे घंटे बाद गांव में हड़कंप मचा गया. दरअसल, हलवा खाने के महज आधे घंटे बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ गई और करीब ढाई सौ लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हो गए.
कई मरीज अस्पताल में भर्ती
मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम और एसडीएम मौके पर पहुंचे और सभी को उपचार किया गया. साथ ही घी और अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए. राहत की बात यह है कि किसी भी मरीज की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही, लेकिन कुछ मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ गया है.
घी और खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच में
कोलारस एसडीएम अनूप शर्मा ने बताया कि हम स्वास्थ्य विभाग की टीम को लेकर मौके पर पहुंचे तो देखा कि जो घी उपयोग किया गया था, वह पूरी तरह से इंसानों के खाने योग्य नहीं था. घी का डिब्बा दिखाकर हमने ग्रामीणों को बताया. इसे संज्ञान में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है. नकली घी का सैंपल लिया गया है. उन्होंने बताया कि जिम्मेदारों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी. किसी मरीज की हालत गंभीर नहीं है… लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर हमने स्वास्थ्य टीम को निगरानी के रूप में गांव में रखा हुआ है.
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