Mistakes to Avoid During Shivling Worship: भारत में भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’ कहा जाता है, क्योंकि वे भक्तों से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और उतनी ही जल्दी क्रोधित भी। उनकी पूजा में नियमों और विधियों का विशेष महत्व है। खासकर जब बात शिवलिंग की पूजा की हो, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि शिवलिंग की पूजा करते समय अगर कुछ गलतियां हो जाएं, तो इससे पूजा निष्फल हो सकती है और भोलेनाथ की कृपा मिलने की बजाय उनका कोप झेलना पड़ सकता है।
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आइए जानते हैं वो 8 मुख्य गलतियां जो शिवलिंग की पूजा करते समय नहीं करनी चाहिए, और साथ ही इनके पीछे छिपा धार्मिक और आध्यात्मिक कारण भी।
कभी भी तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर न चढ़ाएं..
शिव पूजा में तुलसी पत्र वर्जित माना गया है। मान्यता है कि तुलसी माता को शाप मिला था कि वे शिव को अर्पित नहीं की जाएंगी। इसलिए भूलकर भी तुलसी पत्तों से शिवलिंग की पूजा न करें। इसकी जगह आप बेलपत्र, धतूरा, आक, और शिव को प्रिय पुष्प चढ़ा सकते हैं।
केतकी (केवड़ा) का फूल न चढ़ाएं..
एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने केतकी के फूल से झूठ बोलने की योजना बनाई थी, जिसके बाद भगवान शिव ने उसे शाप दिया कि वह कभी उनकी पूजा में उपयोग नहीं होगा। इसलिए केतकी या केवड़ा फूल शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है।
कभी भी नारियल नहीं फोड़ें शिवलिंग पर…
बहुत से लोग मंदिरों में नारियल फोड़ते हैं, लेकिन शिवलिंग पर नारियल फोड़ना या उसका जल चढ़ाना मना है। नारियल विष्णु और देवी पूजा में चढ़ाया जाता है, लेकिन शिवलिंग पर यह परंपरा नहीं है। इससे पूजा का फल नहीं मिलता।

शंख से शिवलिंग पर जल न चढ़ाएं…
शिवपुराण के अनुसार, शंख भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ है, और इसका उपयोग शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने से पूजा निष्फल मानी जाती है। आप किसी पीतल, कांसे या स्टील के पात्र से जल अर्पित करें।
लाल रंग के फूलों का उपयोग न करें..
भगवान शिव को शांति, सौम्यता और सादगी पसंद है। इसलिए उनकी पूजा में लाल रंग के चमकीले फूलों का उपयोग वर्जित है। खासकर गेंदे और गुलाब के लाल फूल न चढ़ाएं। इसकी जगह सफेद आक, कनेर, कमल, और बेलपत्र अर्पित करें।
शिवलिंग की परिक्रमा अधूरी न छोड़ें…
शिवलिंग की संपूर्ण परिक्रमा करना वर्जित है। शास्त्रों में कहा गया है कि शिवलिंग के पीछे की दिशा (नंदी के पीछे) से परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। इसलिए हमेशा आधे गोल घेरे में परिक्रमा करें, फिर वहीं से लौट जाएं। इसे अर्ध-प्रदक्षिणा कहा जाता है।
एक बार अर्पित जल को फिर से न छूएं…
शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल या दूध, जब लोटकर नीचे आ जाए तो उसे दोबारा पूजा में उपयोग न करें। ऐसा करना अशुद्ध माना जाता है। कई लोग यही जल फिर से पात्र में भरकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं, जो शास्त्रों के अनुसार गलत है।
