Shivling in River MP: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बहने वाली बेतवा (प्राचीन वैत्रवती) नदी के बीचों-बीच स्थित एक चमत्कारी और पौराणिक स्थल है—बंगला घाट। यहां एक चबूतरे पर भगवान शिव का शिवलिंग और उनके वाहन नंदी महाराज विराजमान हैं। हैरानी की बात यह है कि कई वर्षों से नदी की तेज धाराएं, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएं भी इस शिवलिंग को अपनी जगह से हिला नहीं सकीं। यह स्थान धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मराठा काल से जुड़ा है इतिहास….
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 18वीं सदी में मराठा सेना ने करवाया था। उस दौरान पानीपत का तीसरा युद्ध (1761) चल रहा था और मराठा सैनिकों ने विदिशा में पड़ाव डाला था। युद्ध से पहले शिवभक्ति करते हुए उन्होंने इस शिवलिंग की स्थापना की। तब से यह स्थान “बंगला घाट के राजा” के नाम से भी जाना जाता है।

बंगला घाट नाम कैसे पड़ा?
यहां कभी एक बंगला (गेस्ट हाउस) हुआ करता था, जहां मराठा सेना विश्राम करती थी। मंदिर भी उसी समय बना। बाद में बाढ़ की वजह से बंगला बह गया, लेकिन शिवलिंग आज भी जस का तस मौजूद है। बेतवा की धाराएं जहां हर साल बदलती हैं, वहीं यह शिवलिंग टस से मस नहीं होता।
क्यों नहीं होते दर्शन बारिश में?
बंगला घाट सेवा समिति के सदस्य राजकुमार प्रजापति के अनुसार, यह स्थान पहले वीरान था। लोग यहां आने से डरते थे क्योंकि यह इलाका जंगलों और पानी से घिरा था। 2020 के बाद इस स्थल का पुनरुद्धार शुरू हुआ और अब यह आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। हालांकि मानसून में बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ जाने के कारण शिवलिंग जलमग्न हो जाता है, जिससे भक्त दर्शन नहीं कर पाते।
सुरक्षा कारणों से प्रशासन की सख्ती
बंगला घाट बेतवा नदी के बीचों-बीच स्थित है, जो बेहद गहरा और जोखिमपूर्ण है। इसलिए प्रशासन ने यहां नहाने, तैरने और मछली पकड़ने पर रोक लगाई है। जिला कलेक्टर के आदेश पर एक चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया है—
“यह क्षेत्र खतरनाक है, मत्स्य आखेट, भ्रमण, स्नान और तैरना प्रतिबंधित है।”
नदियों में बसे हैं देव
हिंदू धर्म में नदियों को देवी का दर्जा प्राप्त है और शिवलिंग का नदी के बीच स्थित होना इसे और भी पवित्र बनाता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे मां वैत्रवती स्वयं शिव का जलाभिषेक कर रही हों। वर्ष 2020 से यह स्थान फिर से जीवंत हुआ और अब यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है।

महाशिवरात्रि पर लगता है भक्तों का तांता…
सूत्रो के अनुसार, स्थानीय लोग बताते हैं कि आज यह स्थान विदिशा ही नहीं, पूरे मध्यप्रदेश में प्रसिद्ध हो चुका है। महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां भव्य आयोजन होता है जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। भक्त सुबह से लाइन में लगकर भोलेनाथ के दर्शन करते हैं। यह अब न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि एक सांस्कृतिक आयोजन स्थल भी बन गया है।
चमत्कारी शिवलिंग से जुड़ी आस्था….
शिव भक्त लक्ष्मीनारायण बताते हैं कि जब बेतवा नदी अपने उग्र रूप में बहती है, तब आसपास के बड़े-बड़े पत्थर बह जाते हैं, लेकिन शिवलिंग अडिग रहता है। ऐसा लगता है जैसे स्वयं शिव इस स्थान की रक्षा कर रहे हों। यहां आने वाले भक्तों को एक अद्भुत शांति और दिव्यता का अनुभव होता है।
