मानसून की डरावनी रातें… 10 सेकेंड में समा गया घर, 2 दिन में 16 मौतें
बुधवार रात 10:15 बजे का वक्त था। शिमला के रामपुर के तकलेच बाज़ार में लोग रोज़ की तरह अपने दिन का अंत कर रहे थे। तभी अचानक एक ऐसी आवाज़ गूंजी जैसे कोई पहाड़ फट गया हो। और सच में… बादल फट गया।

कुछ ही मिनटों में नोगली नाले ने रौद्र रूप धारण कर लिया। पानी ने जैसे सब कुछ लील लिया दुकानें, घर, सड़कें और लोगों की नींद। हालांकि किसी की जान नहीं गई, लेकिन डर सबके चेहरों पर साफ़ था। इस डर की कोई भाषा नहीं होती, वो सिर्फ आंखों में दिखता है।
उधर गंगा ने निगल लिया एक घर, उफनती नदियों का कहर यूपी, बिहार, उत्तराखंड में
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के एक गांव पंखियन में 10 सेकेंड का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में एक पक्का मकान, बच्चों की हँसी और बूढ़ी माँ की पूजा की थाली के साथ… गंगा में समा गया। गांववालों ने बताया गंगा कभी 5 किलोमीटर दूर बहती थी, आज गांव के दरवाज़े पर है। गंगा अब सिर्फ नदी नहीं, एक भूखी ताकत बन गई है।
यूपी के 24 ज़िलों के 1,245 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। 360 मकान ढह चुके हैं। 2 दिन में 16 लोगों की मौत हो चुकी है। मिर्जापुर में एक किसान की डूबने से मौत हुई। चंदौली में एक युवक ने बिजली के खंभे से लटककर जान बचाई आधा घंटा मौत और ज़िंदगी के बीच झूलता रहा।
हिमाचल, उत्तराखंड और बिहार: हर पहाड़ और घाट अब खतरे में
हिमाचल के मंडी में चंडीगढ़-मनाली फोरलेन पर लैंडस्लाइड से ट्रक तक बह गया। उत्तरकाशी में फंसे यात्रियों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया।
उत्तराखंड के धराली में सड़कें टूटी पड़ी हैं, और बद्रीनाथ नेशनल हाईवे मलबे से बंद हो चुका है।

बिहार में गंगा और सोन नदी उफान पर हैं। पटना के घाटों पर पानी 2 फीट तक पहुंच चुका है।
पटना सिटी का महावीर घाट अब एक नदी जैसा नज़र आता है, जहां लोग पहले पूजा करते थे, अब वहां नावें चल रही हैं।
देशभर में ऑरेंज अलर्ट, पर ज़िंदगी का कोई अलर्ट नहीं आता
मौसम विभाग ने बिहार, झारखंड, यूपी, हिमाचल, उत्तराखंड समेत 12 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लेकिन अफसोस, ज़िंदगी में अलर्ट नहीं आते।
कोई नहीं जानता कि कब कोई मकान बह जाएगा, कब कोई पुल ढह जाएगा, कब कोई अपने बच्चों के साथ सिर्फ एक फोटो बनकर रह जाएगा।
मानसून अब सिर्फ मौसम नहीं, एक त्रासदी बन गया है
बचपन में जब बारिश होती थी तो लोग मिट्टी की खुशबू से भर जाते थे। अब बारिश होती है, तो वाट्सऐप पर लोकेशन भेजी जाती है “मैं सुरक्षित हूं।”
एक समय था जब बाढ़ फिल्मों में देखी जाती थी। आज हर परिवार के पास कोई ना कोई कहानी है जिसे बाढ़ लील ले गई।

क्या हमें सिर्फ बारिश के बाद जागना चाहिए?
हर साल यही होता है। बारिश आती है, सब बहा ले जाती है, और हम दो दिन तक सोशल मीडिया पर “प्रार्थना” और “शोक” वाले मैसेज डालते हैं। फिर अगले मानसून तक सब भूल जाते हैं। सरकार को नहीं, हमें खुद को तैयार करने की ज़रूरत है। बाढ़ राहत किट घरों में होनी चाहिए, नदी किनारे बसे गांवों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगने चाहिए।
Read More:- Korba में गजराज की चिहाड़: 46 हाथियों का झुंड हाईवे पार करता दिखा, 85 गांवों में बजा सायरन अलर्ट
Watch Now :-मराठी भाषा पर भिड़ीं महिलाएं! लोकल ट्रेन में हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा
