हाईकोर्ट जा सकते है शंकराचार्य
सूत्रों के मुताबिक, प्रयागराज पुलिस वाराणसी के लिए रवाना हो गई। टीम उनसे पूछताछ कर सकती है, साथ ही जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी कर सकती है। इधर, अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी आश्रम में वकीलों के साथ बैठक की। वकीलों से केस को लेकर सुझाव लिया। माना जा रहा कि गिरफ्तारी पर रोक के लिए हाईकोर्ट जा सकते हैं।

‘हम कहीं भाग नहीं रहे’
बैठक के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कहा- हम कहीं भाग नहीं रहे हैं, हम यहीं मौजूद हैं। पुलिस का सामना करूंगा, जो पूछना है, पूछ लें। हम मदद के लिए तैयार हैं, इसलिए गिरफ्तारी का कोई सवाल ही नहीं है। जनता कह रही है कि उसे UP पुलिस पर भरोसा नहीं है। दूसरे राज्य की, जहां BJP की सरकार न हो, वहां की पुलिस से केस की जांच कराई जाए। वहीं अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि- जिन छात्रों के बारे में बात की जा रही है। उन्होंने न प्रवेश लिया और न कभी पढ़े। कोर्ट में मार्कशीट जमा हुई तो उससे पता चला कि हरदोई में कोई विद्यालय है जहां के वे छात्र हैं। हमारा उनसे क्या लेना देना।
avimukteshwaranand arrest statement: ‘जांच दूसरे राज्य में हो’
इधर, निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानन्द महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा- संत सत्ता के साथ नहीं बल्कि सत्य के साथ रहता है। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज FIR पर कहा-पूरे मामले की जांच किसी दूसरे राज्य में हो, जहां BJP की सरकार न हो। क्योंकि UP पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी ऐसा लगता नहीं है। साथ ही उन्होंने मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज पर भी सवाल खड़े किए हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद का असली नाम
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 2002 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से दीक्षा प्राप्त की थी। संन्यास की दीक्षा प्राप्त करने से पहले उनका नाम उमाशंकर पांडे था। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन होने के बाद उन्हें शंकराचार्य नियुक्त किया गया।
