SHANISHCHARA DHAM SHANI DEV TEMPLE : यहां त्रेतायुग से न्याय कर रहे हैं भगवान शनिदेव
SHANISHCHARA DHAM SHANI DEV TEMPLE : मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के इति गांव में स्थित शनि पर्वत और शनिश्चरा धाम धार्मिक आस्था और पौराणिक महत्व का अद्भुत केंद्र है। यह देश का एकमात्र ऐसा शनि पर्वत है जहां त्रेतायुग से न्याय के देवता भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना होती आ रही है। खास बात यह है कि यहां स्थापित शनिदेव की प्रतिमा एक उल्कापिंड से बनी हुई है, जो इसे और भी दिव्य और रहस्यमय बनाता है।
देश का इकलौता शनि पर्वत
शनिश्चरा धाम ग्वालियर से लगभग 25 किलोमीटर दूर है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु शनि अमावस्या समेत अन्य अवसरों पर दर्शन के लिए आते हैं। खासकर शनि अमावस्या पर यहां चार से पांच लाख भक्त जुटते हैं, जो यह दर्शाता है कि यह स्थान देश के सबसे प्राचीन और पवित्र मंदिरों में से एक है।
उल्कापिंड से बनी हुई है प्रतिमा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शनिदेव को रावण ने लंका में कैद कर अपने सिंहासन के नीचे रखा था। जब भगवान हनुमान जी ने उन्हें रावण की कैद से मुक्त कराया, तो शनिदेव कमजोर हो गए और वहीं से फेंक दिए गए। वे इति गांव के निकट इस पर्वत पर गिरे थे। यहां उन्होंने तपस्या कर अपनी शक्तियां पुनः प्राप्त कीं। यही कारण है कि इस पर्वत को ‘शनि पर्वत’ कहा जाता है।

मंदिर की स्थापना चक्रवर्ती राजा विक्रमादित्य ने की
इतिहास के पन्नों में इस मंदिर की स्थापना चक्रवर्ती राजा विक्रमादित्य ने की थी। उन्होंने यहां शनि देव की मूर्ति के साथ हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित कराई थी। बाद में 1808 में दौलतराव सिंधिया ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
शनि सिंगणापुर में भी यहीं से गई थी मूर्ति
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर में स्थापित भगवान शनिदेव की प्रतिमा भी यहीं से गई थी। यह बात पूर्व पुजारी शिवराम दास त्यागी ने साझा की। उनके अनुसार, एक पुणे के सेठ ने यहां आकर शनिदेव की महिमा देख भक्ति में लीन होकर एक प्रतिमा साथ लेकर चले गए। उस प्रतिमा की स्थापना शिंगणापुर में की गई, जो आज देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
पूजा अर्चना से शनिदेव होते है प्रसन्न
शनिदेव के भक्त मानते हैं कि इस धाम में आकर उनकी पूजा-अर्चना करने से जीवन में आने वाले शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या आदि कष्ट दूर होते हैं। इसके अलावा शनिदेव की कृपा से स्वास्थ्य, संपत्ति और मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक महत्ता भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
शनि अमावस्या का विशेष महत्व
इस शनि पर्वत और धाम की महत्ता को ध्यान में रखते हुए, हर वर्ष विशेष रूप से शनि अमावस्या पर यहां विशेष पूजा, आरती और भंडारा आयोजित होता है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।शनि पर्वत मुरैना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय पौराणिक इतिहास का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां के दर्शन और पूजा से श्रद्धालु अपने जीवन में न्याय, शक्ति और समृद्धि की उम्मीद करते हैं।
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