Shani Amavasya 2025: शनि अमावस्या का दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है… यह तिथि विशेष रूप से शनि ग्रह के प्रभाव को शांत करने और जीवन में शांति लाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है… इस दिन मां गंगा स्नान, पूजा, तर्पण और पिंडदान करने का विशेष महत्व है… साथ ही, शनि अमावस्या पर शनि दोष को दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं।
जानकारी के लिए बतादें कि इस साल शनि अमावस्या 29 मार्च 2025 को पड़ रही है… जो शनिवार के दिन होगी और इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है… इस दिन विशेष शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें ब्रह्म और इंद्र योग तथा दुर्लभ शिववास योग शामिल हैं… इन योगों के प्रभाव से शनि दोष से मुक्ति के साथ-साथ हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

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शनि अमावस्या के दिन किए जाने वाले 10 उपाय
सरसों के तेल का दीपक जलाना: शनि देव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं, जिसमें काली उड़द की साबुत दाल, काले तिल और एक लोहे की कील डालें। यह उपाय शनि की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है।
दान करना: काले तिल, काले वस्त्र, उड़द की दाल और काले कंबल को गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें। इससे शनि दोष का अशुभ प्रभाव कम होता है।
पीपल वृक्ष की पूजा: पीपल के वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और उसके समक्ष दीपक जलाएं। यह उपाय शनि दोष के प्रभाव को कम करता है।
काले कुत्ते को रोटी खिलाना: काले कुत्ते को सरसों का तेल लगाकर रोटी खिलाएं। यह शनि दोष के निवारण में प्रभावी होता है।
शमी वृक्ष की पूजा: शमी वृक्ष की पूजा करें, यह उपाय शनि दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक है।
गंगा स्नान: शनि अमावस्या पर गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिलती है और शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
हनुमान जी की पूजा: हनुमान जी को सिंदूर और घी का चोला चढ़ाकर गुड़ और चने का भोग लगाएं। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि दोष कम होता है।
नीलम रत्न धारण करना: शनि दोष से मुक्ति के लिए ज्योतिषाचार्य की सलाह से नीलम रत्न धारण किया जा सकता है। यह शनि के अशुभ प्रभाव को शांत करने में मदद करता है।
शनि मंत्रों का जाप: शनि देव के मंत्रों का जाप करें, जैसे “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”, यह शनि दोष को कम करने में सहायक होता है।
शनि यंत्र की स्थापना: घर में शनि यंत्र स्थापित करें और उसकी नियमित पूजा करें। इससे शनि की कृपा प्राप्त होती है।
शनि अमावस्या का जानिए महत्व
Shani Amavasya 2025: ज्योतिरविधि सत्यम शास्त्री ने पंचांग के अनुसार शनि अमावस्या के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही तीर्थ स्थान में पूजा पाठ इत्यादि के साथ साथ ओम नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र से जप से सुख शांति धन,धान्य संमृद्धि प्राप्ति होगी। साथ ही शनि देव भगवान को स्नान पूजा-पाठ और विशेष रूप से सरसों के तेल से अभिषेक कराने से विशेष लाभ प्राप्त होगा। बतादें कि कई वर्षों बाद ऐसा योग बना है कि शनिवार के दिन ही शनि अमावस्या पड़ रही है। इन दोनों का योग बहुत ही श्रेयश्कर है। इससे विशेष लाभ प्राप्त लाभ होगा। भगवान नारायण की कृपा बनेगी।
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पंचांग अनुसार शनि अमावस्या का समय
सूर्योदय: सुबह 06:15 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:37 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:42 बजे से 05:28 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:19 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:36 बजे से 06:59 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 12:02 बजे से 12:49 बजे तक
