shakti peeth in india: आइए जानते है माता के 51 शक्तिपीठ के बारे में.. दरहसल भारतीय धार्मिक मान्यताओं में 51 शक्तिपीठ का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इन्हें देवी सती के शरीर के टुकड़ों के गिरने की पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है… बता दें की हिन्दू धर्म में इन शक्तिपीठों की महत्ता इसीलिए है क्योंकि प्रत्येक पीठ पर एक विशेष देवी और उनके शक्ति स्वरूप की उपासना होती है,
जो भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और आशीर्वाद प्रदान करती है…
shakti peeth: जानिए… शक्तिपीठों की पौराणिक कथा
दरहसल… शक्ति पीठों से जुड़ी कथा महादेव भगवान शिव की पत्नी देवी सती से प्रारंभ होती है… देवी सती ने अपने पिता के अपमान से अत्यंत दुःखी होकर आत्मदाह कर लिया था.. जब सती का प्राण त्यागा,
तो भगवान शिव अत्यंत शोक में उनके शव को अपने कंधे पर लेकर घूमने लगे.. इस दौरान उनके शरीर के विभिन्न अंग खंड-खंड होकर पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिर गए… भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनका शरीर काटा और इन्हीं स्थानों को शक्तिपीठ कहा गया…
Devi Sati: क्या है शक्ति पीठों का महत्व?
भारत और उसके पड़ोसी देशों में फैले 51 शक्तिपीठों को हिन्दू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थानों के रूप में पूजा जाता है… और प्रत्येक पीठ में देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा होती है,
जैसे हीरा, काली, भवानी, सती, अन्नपूर्णा आदि है.. इन स्थानों को देवी की शक्ति के केंद्र माना जाता है.. और यहां भक्तों की संपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं…
Devi Sati: प्रमुख शक्तिपीठ कौनसी है ?
51 शक्तिपीठों में कुछ प्रमुख हैं, जैसे कालीघाट (कोलकाता), कमाख्या (गुवाहाटी), वैष्णो देवी (जम्मू), महाकालेश्वर उज्जैन में, और जयन्ती (बंगाल)… ये स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं….
यह है माता के 51 शक्तिपीठ
पश्चिम बंगाल
माता का मुकुट गिरा, जहा कहलाई विमला

उत्तर प्रदेश
माता के कान का गहना गिरा जहा कहलाई मणिकर्णी

तमिलनाडु
माता के पीठ का हिस्सा गिरा.. जहा कहलाई सर्वाणी

मध्य प्रदेश
माता का बायां नितंब गिरा, जहा कहलाई कमलाधव

मध्य प्रदेश
माता का दायां नितंब गिरा, जहा कहलाई देवी नर्मदा

हिमाचल प्रदेश
माता की आंख गिरी, जहा कहलाई मां महिष मर्दिनी

बांग्लादेश
माता की नाक गिरी जहा कहलाई सुनंदा

कश्मीर
माता का गला गिरा, जहा कहलाई महामाया

हिमाचल प्रदेश
माता की जीभ गिरी, जहा कहलाई अंबिका

पंजाब
बायां वक्ष गिरा, जहा कहलाई त्रिपुरमालिनी

उत्तर प्रदेश
दायां वक्ष गिरा, जहा कहलाई देवी शिवानी

गुजरात
माता का हृदय गिरा,जहा कहलाई सती अम्बाजी

उत्तर प्रदेश
माता के बालों का गुच्छा गिरा,जहा कहलाई उमा देवी

तमिलनाडु
माता की ऊपरी दाढ़ गिरी,जहा कहलाईं परवो देवी नारायणी

पंचसागर
माता की निचली दाढ़ गिरी,जहा कहलाईं

बांग्लादेश
माता की बाएं पैर की पायल गिरी, जहा कहलाई अपर्णा

आंध्र प्रदेश
माता की दाएं पैर की पायल गिरी, जहा कहलाई सुंदरी

पश्चिम बंगाल
माता की बाईं एड़ी गिरी, जहा कहलाई देवी कपालिनी

गुजरात
माता का अमाशय गिरा, जहा कहलाई चंद्रभागा

मध्य प्रदेश
माता के ऊपरी होंठ गिरे. जहा कहलाई माता अवंति

महाराष्ट्र
माता की ठोड़ी गिरी.जहा कहलाई देवी भ्रामरी

आंध्र प्रदेश
गाल गिरे,जहा कहलाई देवी विश्वेश्वरी

राजस्थान
बायें पैर की उंगली गिरी जहा कहलाई देवी अंबिका

पश्चिम बंगाल
माता का दायां कंधा गिरा, जहा कहलाई देवी कुमारी

भारत-नेपाल सीमा
बायां कंधा गिरा, जहा कहलाई देवी उमा

पश्चिम बंगाल
पैर की हड्डी, जहा कहलाई कलिका देवी

कर्नाटक
दोनों कान गिरे,जहा कहलाई चामुंडेश्वरी

पश्चिम बंगाल
माता के शरीर का मध्य हिस्सा गिरा, जहा कहलाईं महिषमर्दिनी

बांग्लादेश
माता के हाथ-पैर गिरे, जहा कहलाईं यशोरेश्वरी

पश्चिम बंगाल
माताका निचला होंठ गिरा,जहा कहलाईं देवी फुल्लारा

पश्चिम बंगाल
माता का हार गिरा, जहा कहलाई मां नंदनी

श्रीलंका
माता की पायल गिरी,जहा कहलाई इंद्राक्षी शक्तिपीठ

नेपाल
माता के घुटने गिरे, जहा कहलाई देवी महाशिरा

तिब्बत
माता का दायां हाथ गिरा,जहा कहलाई दाक्षायनी

ओडिशा
माता की नाभि गिरी, जहा कहलाई देवी विमला

नेपाल
माता का मस्तक गिरा, जहा कहलाई गंडकी

पश्चिम बंगाल
माता का बायां हाथ गिरा, जहा कहलाई बहुला देवीत्रिपुरा में माता का दायां पैर गिरा, जहा कहलाई त्रिपुर सुंदरी

बांग्लादेश
माता की दाईं भुजा गिरी,जहा कहलाई देवी भवानी

पश्चिम बंगाल
माता का बायां पैर गिरा, जहा कहलाईं भ्रामरी देरी

असम
माता की योनि गिरी, जहा कहलाईं देवी कामाख्या

पश्चिम बंगाल
माता के दाएं पैर का अंगूठा गिरा, जहा कहलाईं देवी जुगाड्या

कोलकाता
माता के पैर का दूसरा अंगूठा गिरा. जहा कहलाई मां कालिका

उत्तर प्रदेश
हाथ की उंगली गिरी, जहा कहलाई मां ललिता

बांग्लादेश
माता की बाईं जांघ गिरी, जहा कहलाईं देवी जयंती

हरियाणा
माता के पैर की एड़ी गिरी,जहा कहलाई माता सावित्री

अजमेर
माता की कलाई गिरी,जहा कहलाई देवी गायत्री

बांग्लादेश
माता का गला गिरा, जहा कहलाई महालक्ष्मी

पश्चिम बंगाल
अस्थियां गिरी,जहा कहलाईं देवगर्भ

बिहार
माता की दाईं जांघ गिरी, जहा कहलाईं पटनेश्वरी

महाराष्ट्र
माता का त्रिनेत्र गिरा,जहा कहलाईं महालक्ष्मी

मां शक्ति की विशेष आशीर्वाद
इन 51 शक्तिपीठों में प्रत्येक स्थल देवी सती के शरीर के किसी न किसी अंग के गिरने से स्थापित है। ये स्थान भक्तों की शारीरिक और मानसिक उन्नति के लिए शक्तिपीठ रूप में पूजित हैं। यहां पूजा-अर्चना से भगवान त्रिदेवों की कृपा और मां शक्ति की विशेष आशीर्वाद प्राप्त होती है।
देवी माँ की शक्ति का अनुभव
पूरे भारत के साथ-साथ नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी ये शक्तिपीठ पाए जाते हैं। हर शक्तिपीठ की अपनी अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता है। भक्त इन स्थानों पर नवरात्रि और अन्य त्योहारों में श्रद्धा के साथ आते हैं और देवी माँ की शक्ति का अनुभव करते हैं।
