School Children Fed on Recycled Paper : मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील के तहत रद्दी पेपर पर खाना खिलाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में बच्चे फटे हुए कागज़ के टुकड़ों पर खाना खा रहे थे, जबकि वे स्कूल कंपाउंड के फर्श पर बैठे थे। यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर गया।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई
इस घटना के बाद स्कूल प्रभारी को तत्काल प्रभाव सेसज हटा दिया गया। साथ ही, खानपान की व्यवस्था जिम्मेदार स्व-सहायता समूह का टेंडर रद्द कर दिया गया। जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए और बीआरसी कार्यालय को भी नोटिस भेजा गया है।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
जिला शिक्षा अधिकारी और बीआरसी ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के लिए कड़ाई से निर्देश दिए गए हैं। इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मामले की जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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बच्चों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
इस घटना ने बच्चों और अभिभावकों के बीच चिंता और नाराजगी बढ़ा दी है। अभिभावकों ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य और पोषण प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से बेहतर व्यवस्था बनाने की मांग की है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
7 दिनों से रद्दी पेपर पर खाना खिला रहे थे
वीडियो सामने आने के बाद बीईओ हरिशंकर गर्ग मौके पर पहुंचे और रिपोर्ट दी। खाना देने वाले समूह ने प्रशासन के सामने पक्ष रखते हुए बताया था कि समूह में पांच महिलाएं हैं। इनमें से दो महिलाएं बाहर थीं।
मिड-डे मील योजना की चुनौतियां
मिड-डे मील योजना का मकसद बच्चों को पौष्टिक भोजन मुहैया कराना है, लेकिन इस घटना ने इस योजना के संचालन में कई कमियां उजागर की हैं। खान-पान की गुणवत्ता, स्वच्छता, और कर्मचारियों की लापरवाही जैसी समस्याएं बच्चे और उनके परिवारों के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं।
कलेक्टर बोले- मध्याह्न भोजन व्यवस्था की नियमित जांच की जाए
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कहा कि “बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है। भविष्य में किसी भी स्तर पर इस प्रकार की अमानवीयता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुधार के लिए सुझाव
- स्कूलों में भोजन वितरण प्रणाली की नियमित जांच हो।
- स्व-सहायता समूहों की कड़ी निगरानी हो।
- बच्चों के खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता को सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
- अभिभावकों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाए ताकि वे स्थिति पर नजर रख सकें।
शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में यह लापरवाही चिंता का विषय है। बच्चों को बेहतर और सुरक्षित मिड-डे मील मुहैया कराने के लिए प्रशासन और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी गड़बड़ी फिर न हो, इसके लिए सख्त कदम जरूरी हैं।
