SC और इलाहाबाद हाईकोर्ट के बीच टकराव, जस्टिस प्रशांत कुमार विवाद

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ उठाया सवाल
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार को क्रिमिनल मामलों की सुनवाई से हटाने के आदेश के बाद दोनों अदालतों के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। 13 हाईकोर्ट जजों ने इस आदेश के खिलाफ फुल कोर्ट मीटिंग बुलाने की मांग की है।
जस्टिस अरिंदम सिन्हा ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली को एक पत्र भेजा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2023 के आदेश पर हैरानी और गहरी निराशा व्यक्त की गई। पत्र में लिखा गया, “यह आदेश बिना नोटिस जारी किया गया और जस्टिस प्रशांत कुमार के खिलाफ तेज टिप्पणियां की गई हैं।”
क्या था जस्टिस प्रशांत कुमार का विवाद?
दरअसल, जस्टिस प्रशांत कुमार ने एक सिविल विवाद मामले में क्रिमिनल समन को सही ठहराया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर गलती मानते हुए इसे निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन शामिल थे, ने कहा कि जस्टिस प्रशांत कुमार को रिटायरमेंट तक क्रिमिनल केस से हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे आदेश भारतीय न्याय व्यवस्था का मजाक बना रहे हैं।

हाईकोर्ट जजों का विरोध और बैठक की मांग
पत्र में जस्टिस अरिंदम सिन्हा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास हाई कोर्ट्स के प्रशासनिक पर्यवेक्षण का अधिकार नहीं है और यह आदेश न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि फुल कोर्ट मीटिंग बुलाकर इस आदेश की भाषा और लहजे पर नाराजगी दर्ज कराई जाए। इस पत्र पर 12 अन्य जजों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की और नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर नाराजगी जताई । हाईकोर्ट ने एक दोषी की सजा निलंबन की याचिका को खारिज करते हुए कानूनी सिद्धांतों का पालन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर गलती मानते हुए मामला दोबारा विचार के लिए हाईकोर्ट को भेजा।
इस मामले में दोषी को पॉक्सो एक्ट, आईपीसी, और एससी एसटी एक्ट के तहत चार साल की सजा सुनाई गई थी, और दोषी ने सजा निलंबन की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिनों के भीतर नया आदेश जारी करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में आज फिर होगी सुनवाई
आज सुप्रीम कोर्ट में जजों के विवाद पर फिर से सुनवाई होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट के CJI बीआर गवई ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ही करेगी।
Read More:-NSA अजीत डोभाल और पुतिन की मुलाकात: पुतिन इस साल भारत आएंगे
Watch Now :-रक्षाबंधन पर अपनों से मिलने की कीमत 4 गुना!
