Avoid these Mistakes on Shivratri: सावन मास भगवान शिव को समर्पित होता है और इस माह में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। यह शिवरात्रि उतनी ही पुण्यदायिनी मानी जाती है जितनी महाशिवरात्रि। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और महादेव से आशीर्वाद की कामना करते हैं।
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लेकिन कई बार श्रद्धा के बावजूद अनजाने में की गई कुछ गलतियां पूजा को खंडित कर देती हैं, जिससे पूजा का फल नहीं मिलता या महादेव अप्रसन्न हो सकते हैं। ऐसे में सावन की शिवरात्रि पर इन बातों का विशेष ध्यान रखें।
शिवलिंग पर शंख से जल या दूध अर्पित करना…
शिवपुराण के अनुसार शिवजी ने शंखचूड़ नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए शंख से जलाभिषेक करना वर्जित है। कई लोग अज्ञानतावश शंख से जल या दूध चढ़ा देते हैं, जो एक गंभीर त्रुटि मानी जाती है।
सही तरीका: तांबे, चांदी या स्टील के पात्र से शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
हल्दी, सिंदूर या कुमकुम का प्रयोग…
भगवान शिव वैरागी और संन्यासी स्वरूप में हैं। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और कुमकुम चढ़ाना वर्जित है। यह सामग्री देवी पूजा के लिए उपयुक्त होती है, शिव पूजा के लिए नहीं।
सही विकल्प: भस्म, चंदन या सफेद फूल अर्पित करें।
टूटे बेलपत्र या उल्टा चढ़ाना…
बेलपत्र भगवान शिव को अतिप्रिय है, लेकिन कई लोग टूटे हुए या आधे पत्ते अर्पित करते हैं, जो अशुद्ध माने जाते हैं। साथ ही, बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर होना चाहिए।
सही नियम: तीन पत्तों वाला पूरा बेलपत्र चढ़ाएं और साफ जल से धोकर चढ़ाएं।

पूरी परिक्रमा करना..
शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग की आधी परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि शिवलिंग के पीछे का हिस्सा ‘सोमसूत्र’ कहलाता है, जिसे लांघना वर्जित है।
सही विधि: शिवलिंग के सामने से शुरू कर आधे घेरे तक ही परिक्रमा करें
केतकी, तुलसी, कनेर या कमल के फूल चढ़ाना
ये फूल शिव पूजा में वर्जित माने जाते हैं। विशेष रूप से तुलसी माता विष्णु को अर्पित की जाती हैं और शिवलिंग पर इनका अर्पण निषेध है।
सही फूल: सफेद आंकड़ा, सफेद मदार, धतूरा, भांग, बेलपत्र आदि।
तामसिक भोजन करना या व्रत न रखने पर भी लहसुन-प्याज खाना..
शिवरात्रि पर व्रत रखने वालों के साथ-साथ उन लोगों को भी इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए जो व्रत नहीं रख रहे हैं।
सही आहार: फलाहार लें, जैसे साबूदाना, फल, दूध, मूंगफली आदि।
काले रंग के वस्त्र पहनना
पूजा के समय काले वस्त्र पहनना अशुभ माना जाता है, खासकर शिवरात्रि जैसे पर्व पर। यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है।
सही वस्त्र: सफेद, पीले, गुलाबी या हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
कांसे के बर्तन का प्रयोग…
शिव पूजा में कांसे के बर्तन से जल या दूध चढ़ाना वर्जित है। इससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
सही विकल्प: तांबे, चांदी या स्टील के पात्र का प्रयोग करें।
मन में अशुद्ध विचार और कठोर वाणी..
सावन की शिवरात्रि पर मन, वचन और कर्म की शुद्धता आवश्यक है। कठोर भाषा, अपशब्द या नकारात्मक सोच पूजा को बाधित करती है।
सही आचरण: पूरे दिन शांत मन से भगवान शिव का जाप करें – “ॐ नमः शिवाय”।
रात्रि जागरण न करना..
शिवरात्रि की रात को रात्रि जागरण (जागरण/जप/ध्यान) का विशेष महत्व होता है। इसे करने से व्रत पूर्ण माना जाता है। कुछ लोग व्रत रखने के बावजूद रात्रि को सो जाते हैं।
सही उपाय: चार प्रहर की पूजा करें, शिव पुराण का पाठ करें या भजन-कीर्तन करें।
महत्वपूर्ण सुझाव…
1. रुद्राभिषेक अवश्य करें, यदि संभव हो तो किसी ब्राह्मण से करवाएं।
2. शिवलिंग पर चावल (अक्षत) चढ़ाएं, लेकिन टूटे चावल नहीं।
3. शिव-पार्वती के विवाह उत्सव में भाग लें या कथा सुनें।
4. दान-पुण्य करें – विशेष रूप से दूध, जल, वस्त्र और अन्न का दान।
