Sawan Shivling Puja Rules: सावन मास को भगवान शिव की आराधना का सबसे शुभ और फलदायक महीना माना जाता है। इस पावन समय में भक्तजन व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करते हैं और जल-दूध अर्पित करके भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हालांकि शिवभक्ति में लीन होकर कई बार श्रद्धालु ऐसी वस्तुएं भी अर्पित कर देते हैं जो शास्त्रों में वर्जित मानी गई हैं।
ऐसी सामग्री शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव रुष्ट हो सकते हैं और पूजन निष्फल भी हो सकता है। इसलिए सावधानी और शुद्ध भावना के साथ ही पूजन करें। इस लेख में हम जानेंगे उन वस्तुओं के बारे में जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना पूर्णतः निषिद्ध है।
शिवलिंग पर किन चीजों को नहीं चढ़ाना चाहिए?
1. शंख से जल चढ़ाना – विष्णु पूजा की पद्धति
शंख को भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है। यह समुद्र मंथन से उत्पन्न हुआ था और वैष्णव परंपरा में इसका विशेष महत्व है।
शिवलिंग पर शंख से जल अर्पण करना शास्त्रों में वर्जित है क्योंकि यह शिव और विष्णु पूजा की विधियों में टकराव का प्रतीक माना जाता है। इससे पूजन में दोष उत्पन्न हो सकता है और भगवान शिव की नाराजगी भी हो सकती है।

2. हल्दी – सौंदर्य और सौभाग्य की प्रतीक
हल्दी का संबंध देवी लक्ष्मी से होता है और यह स्त्रियों के सौंदर्य और विवाह का प्रतीक मानी जाती है। चूंकि भगवान शिव एक तपस्वी और विरक्त योगी हैं, इसलिए उनसे जुड़े पूजन में हल्दी का उपयोग वर्जित है।
हल्दी शिवलिंग पर अर्पित करने से पूजा की पवित्रता भंग हो सकती है और इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिल सकता है।

3. तुलसी – विष्णु को प्रिय, शिव से वर्जित
तुलसी माता को भगवान विष्णु की पत्नी माना गया है। एक पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी ने भगवान शिव का तिरस्कार किया था, जिसके चलते भगवान शिव ने तुलसी को अपने पूजन से वर्जित कर दिया।
इसलिए शिवलिंग पर तुलसी पत्र अर्पित करना पाप तुल्य माना गया है। इससे पूजा का पुण्य घटता है और शिव कृपा नहीं मिलती।
4. केतकी (केवड़ा) का फूल – झूठ का साथ देने वाला पुष्प
शिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार ब्रह्माजी और विष्णुजी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था। ब्रह्मा जी ने झूठ बोलते हुए केतकी के फूल को साक्षी बनाया था। इस कारण भगवान शिव केतकी के फूल पर क्रोधित हुए और उसे अपने पूजन से वर्जित कर दिया।
शिवलिंग पर केतकी का फूल चढ़ाना आज भी अशुभ और दोषपूर्ण माना जाता है।

5. टूटा या सूखा बेलपत्र – अधूरी श्रद्धा का प्रतीक
बेलपत्र शिव को अत्यंत प्रिय है, विशेषकर त्रिदल (तीन पत्तियों वाला) बेलपत्र। लेकिन यदि बेलपत्र सूखा, मुरझाया या टूटा हुआ हो, तो उसे शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है।
यह अपूर्ण भक्ति और अशुद्ध मनोभावना का संकेत देता है। शुद्ध, हरा और ताजगी युक्त बेलपत्र ही अर्पित करें।

6. नारियल पानी – शिव के तपस्वी स्वरूप के विपरीत
नारियल जल को शिवलिंग पर अर्पित करना शास्त्रों में अनुचित माना गया है। नारियल पानी को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जो शिव के वैरागी और त्यागी स्वरूप से मेल नहीं खाता।
शिवलिंग पर केवल गंगाजल, शुद्ध जल, गाय का दूध, दही, घी, मधु आदि ही चढ़ाना उपयुक्त होता है।
7. चंपा का फूल – मोह और आकर्षण का प्रतीक
चंपा का फूल सुगंधित होता है और इसे कामना और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है। भगवान शिव विरक्ति और तपस्या के प्रतीक हैं, इसलिए ऐसे फूल जो रजोगुण को बढ़ाते हैं उन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है।
शास्त्रों में चंपा के फूल को शिवलिंग पर चढ़ाना तपस्या में विघ्न डालने वाला कर्म बताया गया है।

सावन में शिवलिंग की पूजा कैसे करें?
यदि आप शिवलिंग पर अभिषेक कर रहे हैं तो निम्नलिखित सामग्री उपयोग करें:
1. गंगाजल या स्वच्छ जल
1. गाय का कच्चा दूध
3. दही (ताजा और खट्टा न हो)
4. घी (शुद्ध देशी)
5. मधु (शुद्ध शहद)
6. गन्ने का रस
7. बेलपत्र (त्रिदल और हरा)
8. सफेद फूल जैसे कुंद, कनेर
9. अक्षत (साबुत चावल)
10. चंदन
11. भस्म या विभूति
शिवलिंग की सफाई में भी करें सावधानी..
शिवलिंग को साफ करने के लिए साबुन, डिटर्जेंट या कोई रसायन का उपयोग न करें। केवल गंगाजल, दूध या शुद्ध जल से ही शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए। रसायन से शिवलिंग की पवित्रता भंग होती है और यह शास्त्रों के विपरीत है।
