गाजा युद्ध के चलते लिया फैसला, अब छोटे रक्षा सैन्य समझौते पर जोर
सऊदी अरब अमेरिका के साथ एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने की अपनी मांग से पीछे हट गया है। इस सौदे के बदले में, सउदी को इजरायल के साथ सामान्य संबंध बहाल करने थे। अब वे अमेरिका पर एक छोटे रक्षा सैन्य निगम समझौते पर हस्ताक्षर करने का दबाव बना रहे हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक गाजा युद्ध की वजह से मध्य-पूर्व और मुस्लिम देशों में इसराइल के ख़िलाफ़ गुस्सा है. ऐसे में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) इस तरह का कोई बड़ा समझौता नहीं करना चाहते हैं। हालांकि एमबीएस की शर्त यह है कि अगर इसराइल फिलिस्तीन का राज्य बनाने के लिए ठोस कदम उठाता है तो वो उन्हें मान्यता दे सकता है.
वहीं रिपोर्ट के मुताबिक़ नेतन्याहू जानते हैं कि अगर वो हमास को किसी भी तरह की रियायत देते हैं तो उन्हें अपने देश में भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा. ऐसे में दोनों नेता अपने-अपने देश की आंतरिक राजनीति में व्यस्त हैं।
पश्चिमी राजनयिकों ने रॉयटर्स को बताया कि इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अभी भी सऊदी अरब के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए उत्साहित हैं। अगर ऐसा होता है तो यह मील का पत्थर साबित होगा। इससे अरब जगत में इस्रायल को व्यापक स्वीकार्यता मिलेगी।
डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस वापसी इस समझौते को लेकर सबसे बड़ी चिंता है। ट्रम्प कभी भी फिलिस्तीन का एक अलग राज्य बनाने के समर्थक नहीं रहे हैं। हालांकि, अरब अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप और उनके दामाद जेरेड कुशनर के मोहम्मद बिन सलमान के साथ काफी अच्छे संबंध हैं, इसलिए वे उन्हें इसके लिए मनाने में कामयाब होंगे।
डोनाल्ड ट्रंप और एमबीएस के बीच काफी अच्छे संबंध हैं। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान, ट्रम्प ने इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी के बीच रक्षा सौदे में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
