सतवास के कक्ष क्रमांक 321 में तबाही
Satwas Forest Fire Dewas: सतवास वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 321 में हाल ही में लगी भीषण आग ने पर्यावरण संरक्षण के तमाम दावों की पोल खोल दी। आग इतनी भयावह थी कि सैकड़ों नाजुक पौधे और लाखों रुपये की लागत से की गई मेहनत कुछ ही घंटों में राख में बदल गई।
हरियाली का सपना अब राख में तब्दील
जहां कभी नई हरियाली लहराने की उम्मीद की जा रही थी, वहां अब सिर्फ अधजले पौधे और राख के ढेर दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वन विभाग द्वारा समय पर आग पर काबू पाने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए।
read more; योगी सरकार ने अफसरों को अल्टीमेटम: MP_MLA के पत्रों की अनदेखी करने पर कठोर कार्रवाई होगी

कांटाफोड़ में भी दोहराई गई चूक
ये पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो। महज 15 दिन पहले कांटाफोड़ वन परिक्षेत्र में भी इसी तरह की आग ने लाखों के पौधारोपण को नष्ट कर दिया था। उस समय भी जांच की बात कही गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
जिम्मेदारी तय करने में विभाग नाकाम
हर बार आग लगने के बाद जांच और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, मगर नतीजा शून्य रहता है। न तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है और न ही नुकसान की भरपाई की कोई योजना सामने आती है।
लाखों खर्च, लेकिन जवाबदेही शून्य
हरियाली के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। पौधारोपण, संरक्षण और निगरानी के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर इनका कोई ठोस असर नहीं दिखता। फाइलें बनती हैं, फोटो खिंचते हैं, लेकिन हर बार परिणाम सिर्फ एक – ‘राख’।
क्या इस बार होगी सख्त कार्रवाई?

Satwas Forest Fire Dewas: बतादें कि सतवास वन रेंज में लगभग 10 हजार पौधे लगाए गए थे जिसमें से सैकड़ों पौधे जल गए इससे 15 दिन पूर्व भी कांटाफोड़ जंगल में 25 हजार पौधे लगाए गए थे वहां पर भी लाखो रुपए की लागत से लगाए गए पौधे जल गए, 15 दिन में दो घटना हो गई और जिले के अधिकारी सिर्फ जांच की बात करते है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार सतवास और कांटाफोड़ की घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी? या फिर हमेशा की तरह खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
read more: RR vs GT Vaibhav Suryavanshi: सूर्यवंशी का निकला सूर्य, 35 गेंदों पर जड़ा शतक
रिपोर्टर: हेमंत गुर्जर | लोकेशन: सतवास
