हर जगह गणेश चतुर्थी का जोश और बप्पा के स्वागत की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। शहरों में मंडप सज रहे हैं, ढोल-ताशे बज रहे हैं, लेकिन ज़रा ठहरिए… क्या आपने सोचा है कि जंगल में बप्पा के “परिवार वाले” गजराज क्या कर रहे हैं? तो चलिए हमारे साथ छत्तीसगढ़ के बगल में स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
हाथियों का हैप्पीनेस कैंप
इन दिनों हाथियों के लिए भी एक ‘गणेशोत्सव’ जैसा ही आयोजन चलकर अब समाप्त हुआ — 24 से 31 अगस्त तक चला यह रिजुवेनेशन शिविर, उन ‘गणपति जी के भाई-बंदों’ के लिए था जो पूरे साल जंगल की रक्षा करते हैं।
जंगल में सजे गजराज
मानसून के मौसम में जंगल सफारी भले ही बंद हो (15 जून से 1 अक्टूबर तक), लेकिन गजराजों की ड्यूटी चालू रहती है। STR के ये हाथी लगातार गश्त पर रहते हैं — न दिन देखते हैं, न रात, बस जंगल की सुरक्षा में लगे रहते हैं।तो जब शहरों में बप्पा की सवारी सज रही थी, तब जंगल में बड़े सलीके से हाथियों को आयुर्वेदिक स्नान कराया जा रहा था, उनके पैरों की देखभाल हो रही थी, और उन्हें हर्बल तेल से मालिश दी जा रही थी। जैसे बप्पा को मोदक पसंद हैं, वैसे ही इन हाथियों को दिए गए खास पौष्टिक आहार।
हाथियों का VIP स्पा टाइम
रिजुवेनेशन कैंप में हाथियों को न केवल आराम दिया गया, बल्कि उनके नाखून, दांत, त्वचा, पेट और हाजमे की भी पूरी जांच की गई। जंगल के ये ‘अनकहे हीरो’ सच में ऐसी देखभाल के हकदार हैं। महावतों को भी नया प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे अपने ‘बॉस’ की और बेहतर सेवा कर सकें।गणेश जी को हम विघ्नहर्ता कहते हैं — जो संकटों को दूर करते हैं। जंगल में ये गजराज भी शिकारियों और जंगल तस्करों से टाइगर रिजर्व की रक्षा करते हैं। दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र के संरक्षक हैं।अगर शहरों में गणेशोत्सव श्रद्धा और ऊर्जा का प्रतीक है, तो जंगल में गजराजों का सेवा पर्व संरक्षण और संवेदना का प्रतीक बन गया है।
टाइगर रिजर्व के ‘हीरो’
हाथी केवल जंगल के प्रहरी नहीं, बल्कि इकोसिस्टम को बैलेंस करने वाले भी हैं। उनकी मौजूदगी से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। वे बीज फैलाते हैं, झाड़ियों को नियंत्रित करते हैं और वन्यजीवों के लिए रास्ता खोलते हैं।
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