Satna Diagnostic Centre: मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक अजब-गजब मामला सामने आया… ये घटना स्टेशन रोड स्थित सतना डाग्नोस्टिक सेंटर की सोनोग्राफी रिपोर्ट आने के बाद घटी. जब नेता जी के पेट में गर्भाशय होना बताया गया.आईए पूरा मामला समझते है.

Satna Diagnostic Centre: यह सुना तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई

दरअसल नेता जी पेट में तकलीफ हुई तो वे सेंटर पहुंचे और सोनोग्राफी करवाई, जिसमें बताया गया कि आपके पेट में उल्टा गर्भाशय है. जब नेता जी ने यह सुना तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.

फिलहाल इस मामले में हुई शिकायत के बाद कोई भी जिम्मेदार कुछ कहने को तैयार नहीं. जब इस रिपोर्ट के बारे में मीडिया ने डॉ. अरविन्द सराफ से जानकारी चाही तो वे भी कुछ कहने से बचते रहे.
Satna Diagnostic Centre: इस मामले में जांच कराई जाएगी
वही सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला ने मीडिया से कहा कि इस मामले में जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी करेंगे.. बता दें की सतना जिले में एक 47 साल के व्यक्ति के पास यूट्रस होने की पुष्टि हुई है. कुछ दिन से व्यक्ति के पेट में दर्द था, जिसके बाद उसने सोनोग्राफी कराई. जिसकी जांच रिपोर्ट में यूट्रस (गर्भाशय) दिखाया गया है. रिपोर्ट देखकर मरीज हैरान रह गया..
सतना डायग्नोस्टिक सेंटर में सोनोग्राफी कराई
जानकारी के अनुसार, सतना जिले की उचेहरा नगर पंचायत के अध्यक्ष निरंजन प्रजापति को कई दिन से पेट संबंधी समस्या थी. इसे लेकर 13 जनवरी को उन्होंने सतना डायग्नोस्टिक सेंटर में सोनोग्राफी कराई.
जिसकी जांच रिपोर्ट ने उन्हें हैरान कर दिया, रिपोर्ट में उनके शरीर में यूट्रस यानी गर्भाशय दिखाया गया. यही नहीं, रिपोर्ट में गर्भाशय की स्थिति उल्टी बताई गई है.
डॉक्टर ने कुछ भी बोलने से किया इनकार
नगर पंचायत अध्यक्ष निरंजन प्रजापति ने इसे लेकर सतना डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक डॉ. अरविंद सराफ बात करनी चाही तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया. जिसके बाद साफ हुआ कि सोनोग्राफी में गंभीर लापरवाही बरती गई है.
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घटना को लेकर नाराजगी
वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष निरंजन प्रजापति ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि.. इस तरह की गलत रिपोर्ट किसी की भी मानसिक स्थिति और उपचार प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है. जो मरीज के जीवन के लिए भी खतरा साबित हो सकती है.
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तो आम मरीजों के साथ क्या होता होगा
वहीं, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि अगर, जनप्रतिनिधि की रिपोर्ट में इस तरह की लापरवाही हो सकती है, तो आम मरीजों के साथ क्या होता होगा.
