IAS Santosh Verma mp news: ब्राह्मण बेटियों को लेकर विवादित बयान के बाद सुर्खियों में आए ias संतोष वर्मा और उन्हें अवॉर्ड दिलवाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह मामला 2019 से जुड़ा है, जब वर्मा को आईएएस अवॉर्ड के लिए विभागीय पदोन्नति समिति ने नामांकित किया था। तब उनके खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज होने के तथ्य को नजरअंदाज किया गया था।
IAS Santosh Verma: कैसे हुई अवॉर्ड की प्रक्रिया में गड़बड़ी
खबर है कि तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और अपर मुख्य सचिव दीप्ती गौड़ मुखर्जी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्मा के पक्ष में फर्जी रिपोर्ट तैयार करवाई, ताकि अवॉर्ड प्रक्रिया बाधित न हो। जानकारों विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अपराध दर्ज था, तो वर्मा का नाम पदोन्नति सूची से अलग होना चाहिए था।
IAS Santosh Verma पर लगे आरोप और विवाद
संतोष वर्मा ने 2019 में आईएएस पद के लिए आवेदन किया था, तब उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज था। बाद में फर्जी दोषमुक्ति आदेश के आधार पर उन्हें अवॉर्ड मिला, लेकिन वास्तविकता सामने आने पर उन्हें निलंबित कर जेल भी भेजा गया।वर्मा ने 2022 में कैट में अपील की और वहां से राहत प्राप्त की। हाल ही में 23 नवंबर को उन्होंने बेटियों को लेकर विवादित बयान दिया, जिससे विधानसभा और लोकसभा में विरोध की लहर उठी। इस सबके बीच, मप्र सरकार ने केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को इस मामले पर विचार के लिए पत्र भेजा है। अब यह तय होगा कि वर्मा का अवॉर्ड बरकरार रहेगा या नहीं।
