Santaneshwar Mahadev Temple: भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी में एक ऐसा मंदिर है, जहां निसंतान दंपत्ति संतान की कामना लेकर यहां भगवान के दर्शन करने आते हैं, यह मंदिर संतानेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
Read More: Jyoti Kalash Temple CG: ऐसा अनोखा मंदिर जो मिट्टी के कलश और दियों से है बना!
मान्यता है कि यहां जो भी दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं और जोड़े में भगवान की सच्चे मन से पूजा करते हैं। तो उन्हें संतान सुख का आर्शीवाद मिलता है।
खास दिन होती है इस मंदिर में भीड़
संतानेश्वर मंदिर में अहोई अष्टमी के दिन सबसे ज्यादा भीड़ होती है। यह दिन उन लोगों के लिए खास होता है, जिनकी संतान नहीं है, वो माताएं संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी पर निर्जला व्रत रखती हैं।
यहां सभी माताएं माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ की पूरे विधि- विधान से पूजा करती हैं। जिनकी संताने है वो उनकी लंबी आयु की कामना करती है। इस दिन यहां भारी संख्या में भक्त भगवान के दर्शन करने आते हैं।

कहां है ये मंदिर?
यह मंदिर वाराणसी के प्रसिद्ध मंदिर में से एक है, जो कि कालभैरव मंदिर के पास स्थित है। इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ संतानेश्वर महादेव के रुप में स्थापित हैं – जो निसंतान दंपत्ति को संतान सुख का आशीर्वाद देते है।
मान्यता है कि, संतान प्राप्ति हो या संतान के जीवन से कठिनाईयों को दूर करना हो तो इस मंदिर में माता – पिता आकर सच्ची श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं।

क्या हैं पूजा के नियम?
इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, जल, दूध, दही अर्पित करते है। यहां सोमवार के दिन और महाशिवरात्रि पर्व के दिन विशेष पूजा अनुष्ठान की किया जाता है। पूरे मंदिर में फूलों से सजावट की जाती है। श्रद्धालु महादेव का रुद्राभिषेक करते हैं।
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
स्थानीय निवासी बताते हैं कि, बहुत साल पहले इस मंदिर में एक निसंतान दंपत्ति ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, इस तपस्या से भगवान शंकर प्रसन्न हो गए और जब दंपत्ति से पूछा क्या चाहिए तब उन्होंने संतान सुख का वरदान मांगा और भगवान ने उन्हें पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया।
तब से यह मंदिर संतान प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध हो गया। कहते हैं यहां सच्चे मन से जो मांगों वो इच्छा पूरी होती है।
