hungama parliament session 2025 : रिजिजू बोले- ‘ड्रामा’ करने वालों को देश माफ नहीं करेगा, विपक्ष को हुआ नुकसान!
hungama parliament session 2025: नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि अगर कोई नेता बहस और चर्चा की बजाय सिर्फ राजनीतिक ड्रामा करना चाहता है, तो इससे विपक्ष का ही नुकसान हो रहा है, सरकार का नहीं। रिजिजू ने युवा सांसदों से अपील की कि वे संसद में जनता की आवाज़ उठाएं, न कि सिर्फ हंगामा करें।
“संसद की गरिमा गिराई, देश माफ नहीं करेगा”
रिजिजू ने बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “संसद में हंगामा करने से विपक्ष के सांसदों का ही नुकसान होता है। सरकार बहुमत में है, वह चाहे तो किसी भी बिल को पास करवा सकती है। लेकिन इससे विपक्ष के सांसदों की छवि धूमिल होती है।” उन्होंने युवा सांसदों से कहा कि अगर उनके नेता उन्हें हंगामा करने के लिए कहें, तो वे इसका विरोध करें। “आप जनता की आवाज़ उठाने आए हैं, हंगामा करने के लिए नहीं।”
उनका यह बयान उस समय आया है, जब 12 अगस्त को संसद में बिहार SIR (वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन) पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया था। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने कागज फाड़कर स्पीकर की कुर्सी की ओर फेंके, जिससे सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। रिजिजू ने इस पर कहा, “आपने सदन की गरिमा गिराई है। देश आपको माफ नहीं करेगा। आपके क्षेत्र के लोग आपसे दुखी होंगे।”
विपक्ष का मार्च और हिरासत: “वोट चोर गद्दी छोड़” के नारे
इससे पहले, 11 अगस्त को विपक्ष के 300 सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला था। इस मार्च में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और वोट चोरी के आरोप को लेकर नारेबाजी हुई। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग थाने ले जाया, जहां से दो घंटे बाद रिहा कर दिया गया।
हिरासत से रिहा होने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “यह संविधान बचाने की लड़ाई है। एक व्यक्ति-एक वोट की लड़ाई है, इसलिए हमें साफ वोटर लिस्ट चाहिए।” वहीं, प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यह सरकार डरी हुई है और कायर है।” मार्च के दौरान अखिलेश यादव ने बैरिकेडिंग फांदने की कोशिश की, और जब उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया, तो वे जमीन पर बैठ गए। सांसद “वोट चोर गद्दी छोड़” के नारे लगाते रहे।
120 घंटे की जगह सिर्फ 37 घंटे हुई चर्चा
संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन 21 अगस्त को था। इस सत्र में 12 बिल पास हुए, लेकिन बार-बार व्यवधान, स्थगन और बायकॉट के कारण सदन में 120 घंटे की बजाय सिर्फ 37 घंटे ही चर्चा हो सकी। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन में गंभीर मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाई, क्योंकि विपक्ष ने हंगामा को ही प्राथमिकता दी।
संसद में हंगामा या जनता की आवाज़?
किरण रिजिजू का यह बयान एक बड़ा सवाल खड़ा करता है क्या संसद में हंगामा करना विपक्ष की मजबूरी है या रणनीति? एक तरफ सरकार कह रही है कि विपक्ष ड्रामा कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष का दावा है कि वह जनता के अधिकार के लिए लड़ रहा है।
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