Samastipur soldier martyred: जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए बिहार के समस्तीपुर के वीर सपूत सिपाही सीताराम राय (40) ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की खबर से पूरे जिले में शोक की लहर है। आज उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मोरवा के लोदीपुर लाया गया, जहां हजारों की संख्या में लोग अपने शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे। पूरा इलाका ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से गूंज उठा।

पत्नी बोली – मेरा क्या होगा
पार्थिव शरीर को देखकर शहीद की पत्नी बार-बार बेहोश हो रही थी। वो कह रही थी, उठ जाओ। शहीद का 14 साल का दिव्यांग बेटा है। शहीद सीताराम की पत्नी डीएम रोशन कुशवाहा को पकड़कर रोने लगी। पत्नी ने कहा कि, वो तो चले गए अब हम लोगों का क्या होगा। इस दुनिया में हमारा कोई सहारा नहीं रहा, मेरे बच्चों का क्या होगा। अंतिम यात्रा के साथ-साथ करीब 1 किलोमीटर तक लोगों की भीड़ है। कईयों के हाथ में शहीद सीताराम की तस्वीर थी।
वीडियो कॉल पर हुई थी बात
सिपाही सीताराम राय साल 2002 में उनकी बहाली इंडियन आर्मी में सिपाही के पद पर हुई थी। तब से कई सर्च ऑपरेशन में वे शामिल रहे। बुधवार को जवान की पत्नी सुमन राय से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। शहीद जवान के दोस्त ने कहा कि पत्नी से उन्होंने बताया था कि वो ड्यूटी पर जा रहे हैं। उसके बाद सुबह 11 बजे के करीब आर्मी यूनिट से फोन आया कि उन्हें गोली लग गई है।
कुछ देर बाद शहीद हो जाने की सूचना आई। सीताराम के पिता कोलकाता में ठेला चलाने का काम करते थे।

Samastipur soldier martyred: 15 दिन पहले गए
शहीद जवान सीताराम के छोटे भाई शिवानंद राय ने बताया कि वो साढ़ू के बेटे के शादी में आए थे। 15 दिन पहले ही यहां से गए थे। फिर अप्रैल में घर आने वाले थे। उनके आने पर कई सारे काम करने थे। घर भी बनवाना था। पिता भी बीमार रहते हैं। इस भावुक क्षण में स्थानीय विधायक रणविजय साहू सहित कई लोग शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
