48 ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना
सहारनपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 48 ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो पंजाब, हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहे थे। यह सामग्री उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उन क्षेत्रों में वितरित की जाने वाली राहत सामग्री के समान थी, जिसमें खाद्य पदार्थ, तिरपाल, कपड़े, दवाइयाँ, और अन्य आवश्यक वस्तुएँ शामिल थीं। सीएम योगी ने इस अवसर पर एक प्रतीकात्मक चेक भी प्रदान किया, जो प्रभावित राज्यों के लिए उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से सहायता का प्रतीक था।

संकट का सामना मिलकर करें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा, “संकट का सामना जब सब मिलकर करते हैं, तो फिर संकट, संकट नहीं रह जाता।” उन्होंने उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से पंजाब, हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखंड के बाढ़ पीड़ितों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, जैसे बलरामपुर, श्रावस्ती, कुशीनगर, और बलिया में, सरकार ने तत्काल राहत सामग्री पहुँचाने का कार्य किया है। उसी तरह की सामग्री को अब पड़ोसी राज्यों के लिए भेजा जा रहा है, ताकि वहाँ के लोग भी इस संकट से उबर सकें। योगी ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार संकट की इस घड़ी में अपने पड़ोसी राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
संकट का सामना जब सब मिलकर करते हैं तो फिर संकट, संकट नहीं रह जाता है… pic.twitter.com/ax7gJP6vKX
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 8, 2025
उत्तर प्रदेश में बाढ़ राहत प्रयास
उत्तर प्रदेश में हाल के महीनों में कई जिलों में बाढ़ ने तबाही मचाई है। बलरामपुर, श्रावस्ती, कुशीनगर, बलिया, और गोंडा जैसे जिले भारी बारिश और नेपाल से आने वाले पानी के कारण प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी ने इन क्षेत्रों में राहत कार्यों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), और अन्य एजेंसियों को तैनात किया है। राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ प्रभावित लोगों को भोजन, दवाइयाँ, और आश्रय प्रदान किया जा रहा है। सहारनपुर में 2023 में हुए एक समान कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए, योगी ने बताया कि तब लगभग 1,500 लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया था, और इस बार भी युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।
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Saharanpur flood relief CM Yogi: किसानों के लिए मुआवजा
सीएम योगी ने बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की फसलें बाढ़ और जल-प्रलय की चपेट में आई हैं, उनके नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण शुरू किया गया है। सर्वे की रिपोर्ट प्राप्त होते ही, सरकार तत्काल मुआवजा प्रदान करेगी। योगी ने निर्देश दिए कि यह प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित हो, ताकि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। यह कदम उत्तर प्रदेश के उन 24 जिलों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो बाढ़ की चपेट में सबसे अधिक प्रभावित हैं, जैसे महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, और गोरखपुर।

पंजाब, हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखंड में बाढ़
Saharanpur flood relief CM Yogi: पंजाब, हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखंड में अगस्त 2025 में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। पंजाब में 253.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 74% अधिक थी, और पिछले 25 वर्षों में अगस्त के लिए सबसे अधिक थी। हिमाचल प्रदेश में 72% अतिरिक्त बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ ने 666 सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 5 अगस्त को बादल फटने की घटना ने धराली गाँव को तबाह कर दिया, जिसमें कम से कम चार लोग मारे गए और 50 से अधिक लापता हैं। इन राज्यों में राहत और बचाव कार्यों में भारतीय सेना, NDRF, SDRF, और ITBP सक्रिय हैं।
CM योगी ने की CM धामी से बात
उत्तर प्रदेश सरकार ने इन राज्यों की मदद के लिए तत्परता दिखाई है। सहारनपुर से रवाना किए गए 48 ट्रकों में खाद्य सामग्री, दवाइयां, तिरपाल, और अन्य आवश्यक वस्तुएँ शामिल हैं, जो बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल राहत प्रदान करेंगी। सीएम योगी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
कहां कितना हुआ नुकसान
उत्तर भारत के कई राज्य—पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, और उत्तर प्रदेश—अगस्त और सितंबर 2025 में भारी बारिश, बादल फटने, और बाढ़ की चपेट में आए हैं। इन राज्यों में सूखा, ब्यास, रावी, यमुना, और घग्गर जैसी नदियों के उफान पर आने से व्यापक नुकसान हुआ है। बाढ़ ने फसलों, बुनियादी ढांचे, और मानव जीवन को भारी क्षति पहुंचाई है।
पंजाब में बाढ़ का नुकसान
पंजाब में अगस्त 2025 में 253.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 74% अधिक थी और पिछले 25 वर्षों में अगस्त के लिए सबसे अधिक थी। यह बाढ़ 1988 के बाद सबसे विनाशकारी मानी जा रही है।
- प्रभावित जिले: सभी 23 जिले प्रभावित, जिनमें गुरदासपुर (324 गांव), अमृतसर (190 गांव), होशियारपुर (121 गांव), कपूरथला (123 गांव), फिरोजपुर (111 गांव), फाजिल्का, तरनतारन, और संगरूर प्रमुख हैं।
- प्रभावित गांव: लगभग 1,900 गाँव बाढ़ की चपेट में आए, जिससे 3.8 लाख लोग प्रभावित हुए।
- मृत्यु: 43 लोगों की मौत (8 सितंबर तक), जिसमें पठानकोट में 6 और लुधियाना में 4 मौतें शामिल हैं। कुछ स्रोतों ने 46 मौतों की बात कही है।
- कृषि नुकसान: 1.75 लाख हेक्टेयर फसलें नष्ट, विशेष रूप से धान की फसलें। फाजिल्का में 41,099 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित।
- बुनियादी ढांचा: सड़कें, पुल, और नहरें क्षतिग्रस्त। गुरदासपुर, अमृतसर, और मोहाली में शहरी बाढ़ से सड़कें और आवासीय क्षेत्र जलमग्न।
- आर्थिक नुकसान: प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, हजारों करोड़ रुपये का नुकसान। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र से 60,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है।
- प्राकृतिक कारण: हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से सूखा, ब्यास, और रावी नदियों में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर। भाखड़ा, पोंग, और रणजीत सागर बांधों से पानी छोड़े जाने से स्थिति और गंभीर हुई।
- मानवीय कारण: कमजोर तटबंध, बाढ़ के मैदानों में अतिक्रमण, और प्राकृतिक जल निकासी की कमी ने नुकसान को बढ़ाया।
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8 सितंबर 2025 की स्थिति
8 सितंबर को पंजाब में बारिश की तीव्रता में कमी आई, जिससे राहत कार्यों को गति मिली। हालांकि, कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। गुरदासपुर, पठानकोट, और फाजिल्का में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। सेना, NDRF, और SDRF ने 5,000 से अधिक लोगों को बचाया है, और 54 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। स्कूल और कॉलेज 7 सितंबर तक बंद रहे, और कुछ क्षेत्रों में 8 सितंबर को भी बंद रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 8-9 सितंबर को मध्यम बारिश की चेतावनी दी है, जिससे बाढ़ की स्थिति और बिगड़ सकती है।
हिमाचल प्रदेश में बाढ़ का नुकसान
हिमाचल प्रदेश में अगस्त 2025 में 431.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 68% अधिक थी और 76 वर्षों में अगस्त के लिए नौवीं सबसे अधिक बारिश थी। बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई:
- मृत्यु: 360 लोग मारे गए (20 जून से 4 सितंबर तक), जिनमें 197 बाढ़, भूस्खलन, और बादल फटने से मरे, और 163 सड़क दुर्घटनाओं में।
- प्रभावित जिले: सभी 12 जिले प्रभावित। मंडी (58 मौतें), कांगड़ा (50), चंबा (43), शिमला (38), और कुल्लू (31) सबसे अधिक प्रभावित।
- सड़कें बंद: 1,001 सड़कें बंद, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-03, NH-305, NH-505) शामिल हैं। कुल्लू में 225, मंडी में 205, और शिमला में 212 सड़कें अवरुद्ध।
- संपत्ति नुकसान: 3,000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान। कुल्लू में ब्यास नदी के तटबंध टूटने से तिब्बती कॉलोनी और आखड़ा बाजार प्रभावित।
- कृषि और पर्यटन: सेब के बागान और पर्यटन स्थल जैसे मनाली और शिमला में भारी नुकसान।
- प्राकृतिक कारण: बादल फटने और भारी बारिश से ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ा। मिनी बादल फटने की घटनाओं में वृद्धि।
- मानवीय कारण: अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई, और बांध प्रबंधन की कमी ने नुकसान को बढ़ाया।
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8 सितंबर 2025 की स्थिति
8 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में बारिश की तीव्रता कम हुई, लेकिन सड़कों के अवरुद्ध होने और भूस्खलन के खतरे के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु ने केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग की है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 9 सितंबर को दौरे की उम्मीद है। NDRF और सेना राहत कार्यों में जुटी हुई है। मौसम विभाग ने ऊना, सिरमौर, और बिलासपुर में मध्यम बारिश की चेतावनी दी है।
उत्तराखंड में बाढ़ का नुकसान
उत्तराखंड में अगस्त और सितंबर 2025 में बादल फटने और भारी बारिश ने तबाही मचाई, विशेष रूप से उत्तरकाशी, चमोली, और रुद्रप्रयाग में:
- मृत्यु: 75 लोग मारे गए (अप्रैल से अगस्त तक), जिनमें 10 अगस्त में बाढ़ से मरे। उत्तरकाशी में 5 अगस्त को बादल फटने से 4 लोग मरे और 69 लापता।
- प्रभावित क्षेत्र: उत्तरकाशी के धराली और हरसिल, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, और बागेश्वर सबसे प्रभावित। धराली में आधा गाँव नष्ट।
- बुनियादी ढांचा: जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग और चार धाम यात्रा मार्ग अवरुद्ध। उत्तरकाशी-हरसिल पुल का पुनर्निर्माण हुआ।
- कृषि नुकसान: धान और सेब के बागानों को नुकसान। बागेश्वर में 6 घर नष्ट।
- प्राकृतिक कारण: खीर गंगा नदी में बाढ़ और बादल फटने की घटनाएँ।
- मानवीय कारण: अनियोजित निर्माण और जल निकासी की कमी ने नुकसान को बढ़ाया।
8 सितंबर 2025 की स्थिति
8 सितंबर को उत्तराखंड में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। चार धाम और हेमकुंड साहिब यात्रा 5 सितंबर तक स्थगित रही, और 8 सितंबर को भी कुछ मार्ग बंद हैं। केंद्रीय दल ने देहरादून में स्थिति का जायजा लिया। मौसम विभाग ने मध्यम बारिश की चेतावनी दी है, जिससे भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में बाढ़ का नुकसान
उत्तर प्रदेश में बाढ़ ने 24 जिलों को प्रभावित किया, विशेष रूप से बलरामपुर, श्रावस्ती, कुशीनगर, बलिया, और मथुरा:
- प्रभावित जिले: 24 जिले, जिनमें मथुरा में यमुना नदी 55 सेमी ऊपर बह रही है, जिससे 20 कॉलोनियाँ जलमग्न।
- मृत्यु: सटीक आँकड़े उपलब्ध नहीं, लेकिन जुलाई 2023 में 12 मौतें दर्ज की गई थीं। 2025 में मथुरा और बलिया में कुछ मौतों की खबरें।
- कृषि नुकसान: फसलों को भारी नुकसान, विशेष रूप से धान और गन्ना। सर्वेक्षण शुरू।
- बुनियादी ढांचा: मथुरा में यमुना के किनारे बस्तियाँ और मंदिर जलमग्न। बुलंदशहर और बागपत में स्कूल बंद।
- राहत कार्य: राहत शिविर स्थापित, और सहारनपुर से अन्य राज्यों के लिए राहत सामग्री भेजी गई।
चारधाम यात्रा आज से शुरू जानें कहां-कहां है तबाही!
नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। दिल्ली में यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि मथुरा में 20 से ज्यादा कॉलोनियां डूब गई हैं। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा आज से शुरू हो गई है, जो 5 दिनों तक बंद थी। आइए जानते हैं कि कहां-कहां है तबाही और क्या है हालात।

दिल्ली में यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मॉनेस्ट्री मार्केट, यमुना बाजार, वासुदेव घाट, निगम बोध घाट, मयूर विहार, और कश्मीरी गेट समेत कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। सिविल लाइंस के स्वामीनारायण मंदिर में 5 फीट तक पानी भर गया था। पूरी खबर..
