रूस ने पहली बार साफ कहा है कि वह जानता है भारत पर अमेरिकी दबाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर रूसी तेल की खरीद को लेकर। मॉस्को की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब रूस और भारत दोनों अपने आर्थिक रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
अमेरिका के दबाव का मुद्दा
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि वॉशिंगटन भारत को रूसी तेल खरीद कम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि रूस भारत-अमेरिका रिश्तों में दखल नहीं देगा और न ही अपनी ओर से कोई नकारात्मक टिप्पणी करेगा। पेस्कोव के अनुसार, भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र रुख रखता है और रूस इस दृष्टिकोण को हमेशा सम्मान देता रहा है। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि रूस ऐसे रास्ते तलाश रहा है, जिनसे तेल खरीदारों को सप्लाई बिना किसी रुकावट के मिलती रहे। उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में ऊर्जा व्यापार दोनों देशों के लिए अहम है।
पुतिन का बयान भारत के साथ ट्रेड बढ़ाने की तैयारी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को के VTB इन्वेस्टमेंट फोरम में कहा कि वे भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापार बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। पुतिन के मुताबिक़, पिछले तीन वर्षों में भारत और चीन के साथ रूस का व्यापार काफी तेज़ी से बढ़ा है और आने वाले महीनों में इसमें और वृद्धि की संभावना है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता उन देशों के कारण है जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल दूसरे राष्ट्रों पर दबाव बनाने के लिए करते हैं। पुतिन ने पश्चिमी देशों पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि प्रतिस्पर्धा खत्म करने की कोशिशें असफल साबित हो रही हैं।
भारत का रूसी तेल आयात संख्या में गिरावट
अगस्त में ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। भारत पर यह अतिरिक्त शुल्क 25% था, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल आयात में कमी शुरू कर दी। सितंबर में आयात 17% घट गया और अब अनुमान है कि दिसंबर में यह तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत वर्तमान में रूस से करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चा तेल खरीद रहा है। दिसंबर में यह घटकर 6–6.5 लाख bpd रह सकता है।
