भारतीय रुपया मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 86.67 के ऐतिहासिक
निचले स्तर पर आ गया l यह तक़रीबन पिछले दो साल की सबसे बड़ी गिरावट है l इस गिरावट के पीछे
मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मुख्य कारण रहे l अमेरिकी फेडरल रिजर्व
द्वारा ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार धीमी करने का संकेत देने से डॉलर में मजबूती आई है साथ ही
विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकाले जाने की वजह से भी रुपये पर अतिरिक्त
दबाव पड़ा है l
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है जैसे की इंपोर्ट की जाने वाली चीजों
की कीमतें बढ़ जाती हैं क्योंकि डॉलर महंगा होने से इंपोर्ट की लागत बढ़ जाती है l देश में कच्चे तेल,
दवाओं की संरचनाओं समेत कई चीज़ो लागत बढ़ जाती है l कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगे
हो जाते हैं जिससे ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ जाती है और तमाम जरूरी चीजों की कीमतें यानी महंगाई बढ़ने
का खतरा रहता है l
इंपोर्ट व्यापार के लिए मुश्किलें – वह बिजनेस जो कारोबार के लिए इंपोर्ट पर अधिक निर्भर है उनके लिए
रुपये में गिरावट का मतलब लागत में इजाफा जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव और दूसरी तरफ प्रोडक्ट
की किम्मतें बढ़ने और कंपटीशन में पिछड़ने का डर रहता है जिस कारण इंपोर्ट से जुड़ी लागत में होने वाले
उतार-चढ़ाव किसी बिजनेस के लिए लागत, प्राइसिंग और मुनाफे की लॉन्ग टर्म प्लानिंग करना मुश्किल
बना देते हैं l
विदेश में पढ़ाई और यात्रा के खर्चों पर असर – रुपये की कमजोरी का असर विदेश में पढ़ाई करने वाले
छात्रों और यात्रा करने वालों पर पड़ता है और डॉलर के किम्मत बढ़ने से विदेशी संस्थानों की फीस और वहां
रहने के खर्च समेत तमाम खर्चे बढ़ जाते हैं l साथ ही रुपये के मूल्यांकन मे गिरावट के कारण विदेश यात्रा
करने वाले लोगों का भी खर्चा बढ़ जाता है l
एक्सपोर्ट व्यापार वालों को लाभ – आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल एंड गारमेंट्स, डेरी प्रोडक्ट्स और जेम्स एंड
जूलरी जैसे एक्सपोर्ट करने वाले सेक्टर्स को रुपये की गिरावट का फायदा मिल सकता है, क्योंकि उन्हें
भुगतान डॉलर में मिलता है लेकिन यह फायदा इस बात पर निर्भर है कि उनके प्रोडक्ट का कच्चा माल
कहां से आता है और अगर उसे इंपोर्ट करना पड़ता है, तो एक्सपोर्ट किए जाने वाले फिनिश्ड प्रोडक्ट पर
इंपोर्ट की बढ़ी हुई लागत का कितना असर पड़ता है l
घरेलू शेयर बाजार पर असर – रुपये की गिरावट की वजह से घरेलू शेयर बाजार पर नकारात्मक असर
देखने को मिलता है l भारतीय करेंसी में लगातार गिरावट की आशंका होने पर विदेशी संस्थागत निवेशक
अपनी पूंजी निकालकर डॉलर आधारित निवेश की ओर रुख कर लेते हैं जिससे बाजार अस्थिर हो जाता है l
घरेलू निवेशकों को सलाह – रुपये में गिरावट के समय घरेलू निवेशकों को अपनी नीति पर विचार करते हुऐ
आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट ओरिएंटेड सेक्टर्स में निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है जो
विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ावों का सामना बेहतर तरीके से कर सकते हैं साथ ही लॉन्ग टर्म निवेश
पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये जो निश्चित लाभ देगा l.
