एक कांग्रेसी की आखिरी चिट्ठी जिसने सबको चौंका दिया!

एक दिन जिसने इतिहास को बदल दिया…
RSS Origin Story: 27 सितंबर 1925, नागपुर की विजयादशमी। एक साधारण-सी बैठक, सिर्फ पांच लोग, लेकिन उसी दिन एक ऐसा संगठन जन्म ले रहा था जिसकी गूंज आने वाले 100 वर्षों तक भारत की राजनीति, संस्कृति और समाज में महसूस की जाएगी—राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)।
इस संगठन की कहानी किसी सरकारी आदेश, रजिस्ट्री या मैनिफेस्टो से नहीं शुरू हुई। इसकी शुरुआत हुई एक टूटे हुए भरोसे से, उस भरोसे से जो डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार को महात्मा गांधी और कांग्रेस पार्टी पर था।
RSS Origin Story: जब गांधी की चुप्पी ने बदल दी दिशा
1923 में नागपुर में भड़के सांप्रदायिक दंगे। मुस्लिमों की आपत्ति के बाद गणेश विसर्जन की झांकी पर रोक लगाई गई। हेडगेवार को उम्मीद थी कि कांग्रेस इसका विरोध करेगी, लेकिन गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने चुप्पी साध ली।
क्या हिंदुओं की आस्था की कोई कीमत नहीं? –
RSS Origin Story: ये सवाल हेडगेवार के मन में चुभता रहा। वो चुप नहीं बैठे। उन्होंने ‘दिंडी सत्याग्रह’ छेड़ दिया। जय विट्ठल! के नारों के बीच 20 हजार से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए। यह उनकी राजनीतिक नहीं, आत्मिक बगावत थी।
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RSS Origin Story: कौन थे डॉक्टरजी?
एक ऐसा बालक जिसने 8 साल की उम्र में रानी विक्टोरिया की ताजपोशी की मिठाई फेंक दी थी, ये कहते हुए कि मैं अंग्रेजों के जश्न का हिस्सा नहीं बनूंगा।
13 की उम्र में माता-पिता को खोया, 15 की उम्र में बम बनाना सीखा। कलकत्ता से डॉक्टर की पढ़ाई पूरी करके जब नागपुर लौटे, तो अस्पताल की नौकरी नहीं, युवाओं की विचार क्रांति चुनी।
हेडगेवार पहले कांग्रेस से जुड़े, फिर हिंदू महासभा से भी, लेकिन दोनों जगह उन्हें वह “स्वराज” नहीं मिला जो उनके मन में था—धार्मिक और सांस्कृतिक स्वराज।
संघ की नींव और आखिरी चिट्ठी
RSS Origin Story: 1925 में, विजयादशमी के दिन, उन्होंने संघ की नींव रखी। कोई तामझाम नहीं, कोई पोस्टर नहीं, बस पाँच लोग और एक विचार—एक संगठित, संस्कारित, सशक्त हिंदू समाज। 1940 में जब वे मृत्यु शैय्या पर थे, उन्होंने एक कागज की पर्ची माधव सदाशिव गोलवलकर को दी। उसमें लिखा था:
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अब से संगठन की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारी होगी।
यह चौंकाने वाला फैसला था। सबको लगा था कि उनके सबसे करीबी, अप्पाजी, यह जिम्मेदारी संभालेंगे। लेकिन डॉक्टरजी ने चुना एक प्रोफेसर को, जो अब ‘गुरुजी’ कहलाने लगे।

गोलवलकर और विचारों की मशाल
RSS Origin Story: गोलवलकर, एक वैज्ञानिक, शिक्षाविद और सन्यासी बनने का इच्छुक व्यक्ति, जो अंततः संघ की आत्मा बन गया। उन्होंने ‘We or Our Nationhood Defined’ जैसी किताबों के जरिए विचारधारा को दिशा दी। शाखाओं को संगठित किया, युवाओं को जोड़ा और संघ को गांव-गांव, शहर-शहर फैलाया। उनका स्पष्ट संदेश था— हिंदुस्तान में रहना है तो हिंदु संस्कृति को सम्मान देना होगा।
और फिर एक गोली चली…
30 जनवरी 1948। गांधी की हत्या ने संघ को कटघरे में खड़ा कर दिया। नफरत, डर और राजनीति के बीच, RSS की वैचारिक लड़ाई और कठिन हो गई। लेकिन संगठन रुका नहीं।
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