RSS Mohan Bhagwat Statement: संघ को भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से देखना गलत है. संघ का उद्देश्य सत्ता, चुनाव या टिकट नहीं, बल्कि समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण है.मोहन भागवत ने ये बात भोपाल में RSS की 100वीं वर्षगांठ पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ कोई पैरा-मिलिट्री फोर्स नहीं है, बल्कि स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज में अनुशासन और संगठन की भावना विकसित करता है.
RSS Mohan Bhagwat Statement: भागवत की 10 बड़ी बातें
- स्वतंत्र संगठन: संघ किसी राजनीतिक पार्टी का नियंत्रण नहीं करता। सभी संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं।
- टैरिफ और स्वदेशी अर्थव्यवस्था: अमेरिका जैसे देशों के टैरिफ पर भागवत ने कहा कि भारत को स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। विदेशी वस्तु भी भारत की शर्तों पर हो।
- नई पीढ़ी को भारतीयता से जोड़ना: जेन-जी और युवाओं को संस्कार, इतिहास और भारतीय संस्कृति से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
- फैशन, फास्ट फूड और परिवार: उपभोक्तावाद और फास्ट फूड संस्कृति पर संयम की सलाह। परिवार के साथ भोजन करने की आदत लौटाने की जरूरत।
- संघ की असली पहचान: संघ समाज निर्माण का संगठन है, न कि किसी के विरोध या प्रतिक्रिया में जन्मा प्रेशर ग्रुप।
- समाज बदलेगा, तभी देश बदलेगा: स्थायी स्वतंत्रता तभी संभव है जब समाज में ‘स्व’ का बोध हो।
- सम्पूर्ण समाज का संगठन: संघ का लक्ष्य सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन करना है, न कि केवल कुछ हिस्सों पर प्रभाव डालना।
- स्वयंसेवक निर्माण: संघ केवल स्वयंसेवक तैयार करता है, और उनका कार्य स्वतंत्र रूप से होता है।
- सज्जन शक्ति का नेटवर्क: समाज सुधार में सभी मत-पंथों के सज्जन लोग योगदान करें। संघ उनके बीच सहयोगी नेटवर्क बनाने का प्रयास करता है।
- पंच परिवर्तन का आह्वान: भागवत ने पांच बिंदुओं पर काम करने का आह्वान किया. जिसमे सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध, नागरिक अनुशासन
आखिर में मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू पहचान, संस्कृति और धर्म सभी को जोड़ने वाला माध्यम है। मत-पंथ, संप्रदाय, भाषा या जाति अलग हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय और सामाजिक मूल्यों का समन्वय ही संघ का उद्देश्य है.
