आज अफसरों को सौंपेंगे मिलों की चाबियां

MP NEWS: धान खदी शुरु होते ही राइस मिलर्स अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए है.ये हड़ताल पिछले साल के बकाया 800 करोड़ रुपये की मांग को लेकर की जा रही है.
MP NEWS: 800 करोड़ रुपए शासन से मिलर्स को नहीं मिला
मध्यप्रदेश चावल उद्योग महासंघ के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि धान की मिलिंग में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए जब तक राज्य सरकार आश्वासन नहीं देती है, तब तक कोई भी मिलर्स मध्यप्रदेश में खरीदी जाने वाली धान की मिलिंग नहीं करेगा। हमने पिछले दो साल में जो धान मिलिंग का काम किया है, उसका कुल मिलाकर करीब 1 हजार करोड़ रुपए शासन से मिलर्स को नहीं मिला है।
MP NEWS: मिलर्स बैंक डिफॉल्टर, मिल बंद करने की नौबत
भारतीय खाद्य मंत्रालय की टीम ने अधिकारियों की देखरेख में टेस्ट मिलिंग करवाई थी। इसमें यह सामने आया था कि धान मिलिंग से प्राप्त चावल की झड़ती 67 प्रतिशत से कम आती है। चावल की टूटन 25 प्रतिशत से अधिक आती है। भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय की इस रिपोर्ट को मान्य कर प्रदेश में कस्टम मिलिंग करवाई जाए। खरीफ विपणन वर्ष 23-24 में कैबिनेट बैठक में धान मिलिंग के बाद अपग्रेडेशन राशि देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक यह राशि नहीं मिली है।
MP NEWS: अटका है 23-24 का भुगतान
मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सीएमआर चावल में एक प्रतिशत एफआरके चावल मिक्सिंग कर चावल गोदामों में जमा किया जाता है। इसका प्रतिवर्ष पांच रुपए प्रति क्विंटल की दर से भारतीय खाद्य निगम नान को भुगतान करता है, लेकिन 23-24 में की गई मिलिंग का यह भुगतान नॉन मिलर्स को नहीं कर रहा है।
