इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को दी गई 21 तोपों की सलामी खास इसलिए रही कि अब इसमें पूरी तरह स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल हुआ। इससे न सिर्फ पुरानी ब्रिटिश परंपरा को आधुनिक स्वरूप मिला, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं का संदेश भी गया।
ब्रिटिश तोपों से आधुनिक स्वदेशी गन तक
पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल होता था। अब इसे पूरी तरह भारत में बनी 105 मिमी लाइट फील्ड गन ने बदल दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिवर्तन सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि भारतीय सेना के स्वदेशी हथियारों पर बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।
1721 फील्ड बैटरी की भूमिका
यह सलामी दिल्ली के कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है और इसे 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल), भारतीय सेना की प्रतिष्ठित आर्टिलरी यूनिट द्वारा संचालित किया जाता है। यह बैटरी राष्ट्रीय अवसरों पर तोपों की सलामी देने की परंपरा निभाती है, जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, शहीद दिवस और राष्ट्रपति भवन में विदेशी अतिथियों का औपचारिक स्वागत।
तोपों की फायरिंग और समारोह का समन्वय
तोपों की फायरिंग तीन समकालिक क्रियाओं के साथ पूरी तरह समन्वित रहती है प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा ध्वज आरोहण, सेवा बैंड द्वारा राष्ट्रीय गान का वादन और प्रेसिडेंट्स बॉडी गार्ड द्वारा राष्ट्रीय सलामी। इस समन्वित प्रक्रिया से सलामी का हर क्षण अनुशासन और गरिमा का प्रतीक बन जाता है।भारतीय 105 मिमी लाइट फील्ड गन के इस्तेमाल से अब यह परंपरा और भी आधुनिक और आत्मनिर्भर हो गई है। यह बदलाव भारत की सैन्य परंपराओं और रक्षा निर्माण क्षमता की निरंतरता को दर्शाता है।
