Ratapani Tiger Death: मध्य प्रदेश के रातापानी टाइगर रिजर्व से फिर एक बाघ की संदिग्ध मौत की खबर सामने आई है. पिछले साल से राज्य में बाघों की लगातार मौत ने वन्यजीव संरक्षण की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Ratapani Tiger Death: पिछले 1 साल में 55 बाघों की मौत
नर्मदापुरम के सोनतालई क्षेत्र में बुधवार को एक बाघ के शव मिलने के ठीक अगले दिन, रातापानी अभ्यारण्य के भीमकोठी जंगल से दूसरा बाघ मृत पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बाघ की मौत संदिग्ध बताई जा रही है। पिछले एक साल में मध्य प्रदेश में कुल 55 बाघों की मौत दर्ज की गई है. इनमें से 11 बाघों का शिकार किया गया, जबकि 6 को अंग तस्करी के लिए मारा गया। बाकी 38 बाघ प्राकृतिक कारणों से मरे, जिनमें रोग, वृद्धावस्था, दुर्घटना और रेल-सड़क हादसे शामिल हैं।
Ratapani Tiger Death: रातापानी का नया मामला
नए साल के जनवरी महीने में रातापानी में यह दूसरा मामला है। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ का पोस्टमार्टम किया गया। शव के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत प्राकृतिक थी या किसी संदिग्ध गतिविधि का परिणाम। इसी तरह, बांधवगढ़ नेशनल पार्क में जनवरी से अब तक चार बाघों की मौत हो चुकी है।
वन्यजीव संरक्षण का दबाव
2022 में मध्य प्रदेश में कुल 785 बाघ पाए गए थे, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। राज्य के कई अभ्यारण्यों में बाघों की संख्या लगभग 80-90 के बीच है, जबकि तेंदुए 200 के करीब हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार मौतों से न केवल पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है, बल्कि संरक्षण प्रयासों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ढोल डॉग की राहत
रातापानी में हाल ही में संकटग्रस्त प्रजाति ढोल डॉग की साइटिंग ने वन्यजीव प्रेमियों को थोड़ी राहत दी है। यह लाल-भूरे रंग का फुर्तीला जानवर 14 से 20 के झुंड में रहता है और आईयूसीएन की लुप्त-प्राय सूची में शामिल है। यह बड़े शिकारियों जैसे हिरण, सांभर और कभी-कभी बाघ या भालू से शिकार भी छीन सकता है। वन विभाग ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं, जो स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
