Rat Temple India: राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक कस्बे में स्थित करणी माता मंदिर है, जो कि दुनिया भर में “चूहों के मंदिर” के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अनूठी मान्यताओं और परंपराओं के कारण प्रसिद्ध है।
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इस मंदिर की विशेषता है यहां रहने वाले लगभग 25,000 चूहे, जिन्हें श्रद्धालु “काबा” कहते हैं। यह चूहे यहां आजादी से घूमते हैं, खाते -पीते हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात भक्त उन्हें पूजते हैं। इनमें से सफेद चूहों को देवी करणी माता का प्रतीक माना जाता है और उनका दर्शन अत्यंत शुभ व भाग्यशाली माना जाता है।

पौराणिक मान्यता और कथा…
करणी माता एक तपस्विनी और योद्धा थीं, जो चारण जाति से थीं। मान्यता के अनुसार, जब करणी माता के पुत्र लक्ष्मण की मृत्यु तालाब में डूबने से हो गई थी, तो माता ने यमराज से अपने पुत्र को जीवित करने की प्रार्थना की। यमराज ने वरदान दिया कि लक्ष्मण और उनके वंशज चूहे बनकर मंदिर में निवास करेंगे। तभी से मंदिर में रहने वाले सभी चूहों को करणी माता का वंशज माना जाता है।
शनि और राहु दोष निवारण का केंद्र…
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से शनि और राहु ग्रह दोष समाप्त हो जाता है। श्रद्धालु यहां आकर न केवल मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं, बल्कि काबा चूहों की सेवा और दर्शन से आध्यात्मिक शांति भी पाते हैं।

कब जाएं करणी माता मंदिर?
इस मंदिर में हर साल दो बार भव्य मेले का आयोजन होता है —
1. चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल)
2. शारदीय नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर)
इन अवसरों पर लाखों श्रद्धालु देशभर से यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर के पास धर्मशालाएं और आवासीय सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे श्रद्धालुओं को ठहरने में कोई असुविधा न हो।
मंदिर का इतिहास और स्थापत्य कला…
मूल मंदिर का निर्माण बीकानेर के राजा जय सिंह द्वारा करवाया गया था। मंदिर को वर्तमान भव्य रूप महाराजा गंगा सिंह ने 15वीं से 20वीं सदी के बीच राजपूत स्थापत्य शैली में दिया।
मंदिर में संगमरमर की सुंदर नक्काशी, चांदी के दरवाजे और भव्य स्तंभ इसकी शिल्पकला को दर्शाते हैं। वर्ष 1999 में हैदराबाद के कुंदन लाल वर्मा ने मंदिर के विस्तार में योगदान दिया।
मान्यता है कि संवत 1595 की चैत्र शुक्ल नवमी के दिन गुरुवार को करणी माता ज्योतिर्लीन हुई थीं।

धार्मिकता, आस्था और संस्कृति का अद्वितीय संगम…
करणी माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। यहां की मान्यताएं, चूहों के प्रति श्रद्धा, और करणी माता की जीवन गाथा हर श्रद्धालु को एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती हैं।
