
भादवा मेला की तैयारियां
भाद्रपद महीने की शुरुआत यानी 10 अगस्त से ही श्रद्धालु रामदेवरा पहुंचना शुरू हो गए हैं। वर्तमान में रोजाना लगभग दो लाख लोग बाबा की समाधि के दर्शन कर रहे हैं। समाधि समिति का अनुमान है कि 25 अगस्त से 7 सितंबर तक चलने वाले इस मेले में 60 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे। मेले में राजस्थान के साथ-साथ गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, असम और बंगाल जैसे राज्यों से भक्त पहुंच रहे हैं।
Ramdevra Bhadwa Mela 2025: सुरक्षा व्यवस्था
मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जिला पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में 521 सुरक्षाकर्मी और 111 होमगार्ड तैनात किए गए हैं। मेला क्षेत्र में 264 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, और पुलिस अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। इमरजेंसी रिस्पांस टीम (ERT) भी मेला क्षेत्र में तैनात है।

सफाई व्यवस्था
मेले की स्वच्छता के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। पंजाब से आए 280 सेवादार सफाई कार्य में जुटे हैं। मेला क्षेत्र को तीन जोन में बांटा गया है ताकि सफाई व्यवस्था सुचारू रहे। बाबा रामदेव समाधि समिति ने गंदगी रोकने के लिए छोटे घोड़े, ध्वजा, चादर और अगरबत्ती की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।

3 शिफ्टों में दर्शन
श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन के लिए मंदिर सुबह 3 बजे से रात 1 बजे तक 22 घंटे खुला रहता है। 100 पुजारी तीन शिफ्टों में दर्शन करवाने में लगे हैं। मंदिर परिसर में लंबी कतारों को व्यवस्थित करने के लिए कतारों के ऊपर पुलिया बनाई गई है, और पैदल मार्ग पर टीनशेड की व्यवस्था की गई है।
परिवहन और पार्किंग
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए परिवहन सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे ने जोधपुर, भगत की कोठी, श्रीगंगानगर और लालगढ़ से रामदेवरा के लिए विशेष मेला ट्रेनें शुरू की हैं, जो 1 अगस्त से 7 सितंबर तक चलेंगी। इसके अलावा, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने 120 अतिरिक्त बसें लगाई हैं, जिनमें 50% किराए की छूट दी गई है। मेला क्षेत्र में 9 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है, और गोमट से आने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

Ramdevra Bhadwa Mela 2025: यात्री विश्राम गृह
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 7 यात्री विश्राम गृह बनाए गए हैं। इन विश्राम गृहों में भक्तों के ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। ये विश्राम गृह दूर-दराज से आने वाले पैदल यात्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
बिजली और जलदाय व्यवस्था
विद्युत विभाग को बिजली के ढीले तारों को ठीक करने और मेला अवधि तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। रामसरोवर तालाब पर प्रकाश और सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। जलदाय विभाग ने सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की है ताकि श्रद्धालुओं को पानी की कमी न हो।
चिकित्सा सुविधाएं
मेले में चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविर, मोबाइल मेडिकल यूनिट, एंबुलेंस सेवा और प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए गए हैं। चिकित्सा विभाग को पर्याप्त दवाइयों और चिकित्सा स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व
मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। इसके अलावा, 1500 से अधिक दुकानें लगती हैं, जहां व्यापारी विभिन्न वस्तुएं बेचते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
रामदेव जी: इतिहास और महत्व
बाबा रामदेव जी, जिन्हें रामसापीर के नाम से भी जाना जाता है, 15वीं शताब्दी के एक महान संत, समाज सुधारक और लोकदेवता थे। उनका जन्म 1409 ईस्वी में बाड़मेर जिले की शिव तहसील के ऊँडूकासमेर गांव में हुआ था। वे तंवर राजपूत वंश के शासक अजमाल सिंह के पुत्र थे। बाबा रामदेव को भगवान श्रीकृष्ण का कलयुगी अवतार माना जाता है। उन्होंने सामाजिक समरसता, हिंदू-मुस्लिम एकता और कर्म की शुद्धता पर जोर दिया। वे मूर्ति पूजा, तीर्थ यात्रा और जाति व्यवस्था के घोर विरोधी थे। हिंदू उन्हें “रामदेव जी महाराज” और मुस्लिम समुदाय उन्हें “रामसापीर” के रूप में पूजता है।

रुणिचा धाम
Ramdevra Bhadwa Mela 2025: रामदेवरा, जिसे रुणिचा धाम भी कहा जाता है, बाबा रामदेव की समाधि स्थल है। यह जैसलमेर जिले के पोकरण में स्थित है। बाबा रामदेव ने अपने जीवनकाल में सामाजिक समानता और भक्ति का संदेश दिया। उनकी मृत्यु के बाद, उनकी समाधि पर मंदिर का निर्माण किया गया, जो आज देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र है। रामदेवरा का निर्माण इसलिए किया गया ताकि बाबा के संदेश और उनकी शिक्षाओं को जीवित रखा जाए। यह स्थल सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता का प्रतीक है, जहां 36 कौम के लोग एक साथ दर्शन करने आते हैं।
