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14 साल का ‘वनवास’ खत्म: क्यों नंगे पैर रहे और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की?

Shital Sharma April 15, 2025

ramapal kashyap 14 years barefoot pm modi meeting : क्यों 55 साल के रामपाल कश्यप ने 14 साल तक नंगे पैर रहने की प्रतिज्ञा ली?

ramapal kashyap 14 years barefoot pm modi meeting : हरियाणा के एक छोटे से गांव खेरी गुलामाली के रामपाल कश्यप ने 14 सालों तक नंगे पैर रहने का जो संकल्प लिया, वह न सिर्फ एक व्यक्तिगत कहानी है, बल्कि यह देश की राजनीति में एक अजीब और प्रेरणादायक मोड़ है। यह कहानी उस समय की है जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उनका प्रधानमंत्री बनने का सपना सिर्फ उनके समर्थकों में ही नहीं, बल्कि आम जनता में भी था।

2011 में, रामपाल कश्यप ने एक साधारण लेकिन मजबूत प्रतिज्ञा ली – वह तब तक नंगे पैर रहेंगे जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बनते और वह उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं कर लेते। यह संकल्प इतना गहरा था कि उन्होंने कैथल जिले के अपने गांव में एक मजदूर के रूप में दिन-रात कठिनाई से काम किया, जबकि उनके पैरों में कभी भी जूते नहीं थे। बारिश हो या धूप, कश्यप ने कभी अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया।

रामायण की तरह, रामपाल का ‘वनवास’

रामपाल की कहानी रामायण से मिलती-जुलती है, जहां भगवान राम ने 14 वर्षों का वनवास बिताया था। रामपाल कश्यप ने भी अपना 14 साल का समय धैर्य और विश्वास के साथ काटा, ताकि उनका आदर्श प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच सके। उनका यह संकल्प केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता का नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का था, जो अपने आदर्शों और विश्वासों के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।

हरियाणा के एक छोटे से गांव खेरी गुलामाली के रामपाल कश्यप ने 14 सालों तक नंगे पैर रहने का जो संकल्प लिया, वह न सिर्फ एक व्यक्तिगत कहानी है, बल्कि यह देश की राजनीति में एक अजीब और प्रेरणादायक मोड़ है। यह कहानी उस समय की है जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उनका प्रधानमंत्री बनने का सपना सिर्फ उनके समर्थकों में ही नहीं, बल्कि आम जनता में भी था। 2011 में, रामपाल कश्यप ने एक साधारण लेकिन मजबूत प्रतिज्ञा ली – वह तब तक नंगे पैर रहेंगे जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बनते और वह उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं कर लेते। यह संकल्प इतना गहरा था कि उन्होंने कैथल जिले के अपने गांव में एक मजदूर के रूप में दिन-रात कठिनाई से काम किया, जबकि उनके पैरों में कभी भी जूते नहीं थे। बारिश हो या धूप, कश्यप ने कभी अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया। रामायण की तरह, रामपाल का 'वनवास' रामपाल की कहानी रामायण से मिलती-जुलती है, जहां भगवान राम ने 14 वर्षों का वनवास बिताया था। रामपाल कश्यप ने भी अपना 14 साल का समय धैर्य और विश्वास के साथ काटा, ताकि उनका आदर्श प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच सके। उनका यह संकल्प केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता का नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति का था, जो अपने आदर्शों और विश्वासों के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। मोदी की जीत के बाद भी 10 सालों तक क्यों इंतजार किया? 2014 में नरेंद्र मोदी की भारी जीत के साथ रामपाल कश्यप का सपना आधा पूरा हो गया था। मोदी प्रधानमंत्री बने, लेकिन कश्यप का बाकी का सपना – मोदी से मुलाकात – अभी भी पूरा नहीं हुआ था। हालांकि, कश्यप ने अपने संकल्प पर कायम रहते हुए इंतजार करना जारी रखा। यहां तक कि जब मोदी का प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके गांव में कश्यप की एक बड़ी चर्चा हुई, तो भी उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। वह जानते थे कि एक दिन उनका यह सपना पूरा होगा। अंत में पीएम मोदी से मुलाकात: रामपाल कश्यप की मन्नत पूरी हुई सोमवार को, 55 वर्षीय रामपाल कश्यप की 14 साल की धैर्यपूर्ण तपस्या आखिरकार रंग लाई, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। यह एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल था, क्योंकि कश्यप का यह सपना सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उनके गांव और इलाके के कई लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गया था। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान कश्यप ने न केवल अपनी संघर्ष की कहानी साझा की, बल्कि मोदी से कड़ी मेहनत और विश्वास के माध्यम से सफलता की महत्वपूर्ण बातें भी सीखी। कश्यप की कहानी का संदेश रामपाल कश्यप की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर किसी के पास सच्ची प्रतिबद्धता और विश्वास हो, तो कोई भी कठिनाई या बाधा उसे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने से रोक नहीं सकती। कश्यप ने अपनी संपूर्ण आत्मा और संवेदनाओं के साथ यह प्रतिज्ञा ली थी, और 14 साल बाद उसकी मेहनत का फल मिला। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन सभी की है जो अपने सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ नायक बनते हैं। रामपाल कश्यप के संकल्प की गहरी भावना रामपाल कश्यप का यह संकल्प न केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता की भावना को दर्शाता है, बल्कि यह दर्शाता है कि यदि किसी का आदर्श और विश्वास मजबूत हो, तो वह किसी भी समय, किसी भी स्थिति में अपनी प्रतिज्ञा निभा सकता है। कश्यप का यह संदेश हमें यह भी सिखाता है कि विश्वास और धैर्य से जीवन के सबसे कठिन संघर्षों को भी पार किया जा सकता है। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा हमें यह याद दिलाती है कि हर किसी के अंदर सपनों को पूरा करने की ताकत होती है, बस जरूरत है तो उन्हें सही दिशा और इरादे से आगे बढ़ने की। निष्कर्ष: एक अनोखी प्रेरणा की कहानी रामपाल कश्यप की 14 साल की नंगे पैर यात्रा केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवन-शैली की मिसाल है, जो सच्चे संघर्ष और विश्वास का प्रतीक है। उनका यह वचन और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर रहेगा। कश्यप की कहानी सिर्फ इस बात की ओर इशारा नहीं करती कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की, बल्कि यह बताती है कि अगर किसी के पास सच्चे आदर्श और कठिन संकल्प हों, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

मोदी की जीत के बाद भी 10 सालों तक क्यों इंतजार किया?

2014 में नरेंद्र मोदी की भारी जीत के साथ रामपाल कश्यप का सपना आधा पूरा हो गया था। मोदी प्रधानमंत्री बने, लेकिन कश्यप का बाकी का सपना – मोदी से मुलाकात – अभी भी पूरा नहीं हुआ था। हालांकि, कश्यप ने अपने संकल्प पर कायम रहते हुए इंतजार करना जारी रखा।

यहां तक कि जब मोदी का प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके गांव में कश्यप की एक बड़ी चर्चा हुई, तो भी उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। वह जानते थे कि एक दिन उनका यह सपना पूरा होगा।

अंत में पीएम मोदी से मुलाकात: रामपाल कश्यप की मन्नत पूरी हुई

सोमवार को, 55 वर्षीय रामपाल कश्यप की 14 साल की धैर्यपूर्ण तपस्या आखिरकार रंग लाई, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। यह एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल था, क्योंकि कश्यप का यह सपना सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उनके गांव और इलाके के कई लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गया था।

प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान कश्यप ने न केवल अपनी संघर्ष की कहानी साझा की, बल्कि मोदी से कड़ी मेहनत और विश्वास के माध्यम से सफलता की महत्वपूर्ण बातें भी सीखी।

कश्यप की कहानी का संदेश

रामपाल कश्यप की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर किसी के पास सच्ची प्रतिबद्धता और विश्वास हो, तो कोई भी कठिनाई या बाधा उसे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने से रोक नहीं सकती। कश्यप ने अपनी संपूर्ण आत्मा और संवेदनाओं के साथ यह प्रतिज्ञा ली थी, और 14 साल बाद उसकी मेहनत का फल मिला। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन सभी की है जो अपने सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ नायक बनते हैं।

रामपाल कश्यप के संकल्प की गहरी भावना

कश्यप का यह संकल्प न केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता की भावना को दर्शाता है, बल्कि यह दर्शाता है कि यदि किसी का आदर्श और विश्वास मजबूत हो, तो वह किसी भी समय, किसी भी स्थिति में अपनी प्रतिज्ञा निभा सकता है।

कश्यप का यह संदेश हमें यह भी सिखाता है कि विश्वास और धैर्य से जीवन के सबसे कठिन संघर्षों को भी पार किया जा सकता है। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा हमें यह याद दिलाती है कि हर किसी के अंदर सपनों को पूरा करने की ताकत होती है, बस जरूरत है तो उन्हें सही दिशा और इरादे से आगे बढ़ने की।

निष्कर्ष: एक अनोखी प्रेरणा की कहानी

रामपाल कश्यप की 14 साल की नंगे पैर यात्रा केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवन-शैली की मिसाल है, जो सच्चे संघर्ष और विश्वास का प्रतीक है। उनका यह वचन और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर रहेगा।

कश्यप की कहानी सिर्फ इस बात की ओर इशारा नहीं करती कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की, बल्कि यह बताती है कि अगर किसी के पास सच्चे आदर्श और कठिन संकल्प हों, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

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