जल संकट से राहत
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि हिमालय से निकलने वाली चिनाब नदी का अतिरिक्त पानी, जो वर्तमान में उपयोग नहीं हो पा रहा, ब्यास, रावी, और उझ जैसी पूर्व की ओर बहने वाली नदियों में स्थानांतरित किया जा सकता है। इस पहल से न केवल राजस्थान, बल्कि उत्तर भारत के अन्य राज्यों को भी जल संकट से राहत मिलेगी। चिनाब नदी का पानी राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल के लिए वरदान साबित हो सकता है।

Rajasthan Water Crisis: जल संकट से जूझता राजस्थान
राजस्थान, जो भारत के सबसे शुष्क राज्यों में से एक है, लंबे समय से जल संकट का सामना कर रहा है। राज्य के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, और बारिश पर निर्भरता के कारण कृषि और पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री ने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि चिनाब नदी की परियोजनाएं न केवल जल संकट को कम करेंगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगी।

तीन लाख हेक्टेयर भूमि को लाभ
प्रस्तावित जल परियोजनाओं के लागू होने पर राजस्थान को लगभग तीन लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकती है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा, पेयजल की उपलब्धता बढ़ने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होगा।
Rajasthan Water Crisis: उत्तर भारत के लिए व्यापक लाभ
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यह परियोजना केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। चिनाब नदी का पानी अन्य नदियों में स्थानांतरित करने से पंजाब, हरियाणा, और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को भी लाभ मिलेगा। इससे क्षेत्रीय सहयोग बढ़ेगा और जल प्रबंधन में एक नया मॉडल स्थापित होगा।
केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से इन परियोजनाओं को प्राथमिकता देने और जल्द से जल्द लागू करने की अपील की है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार राजस्थान के जल संकट को समझते हुए आवश्यक कदम उठाएगी। यह परियोजना न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
भविष्य की योजनाएं और उम्मीदें
राजस्थान सरकार इस परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि चिनाब नदी का पानी यदि प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जाए, तो यह राजस्थान के लिए एक स्थायी जल स्रोत बन सकता है।
