Rajasthan Vande Mataram 150th anniversary : राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर राजस्थान में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें प्रदेश के सभी स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन कराया गया। इस आयोजन में 1.25 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लेकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह आयोजन प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।
राजनीतिक विवाद का कारण
इस ऐतिहासिक आयोजन के बीच राजस्थान में वंदे मातरम की सियासत ने जोर पकड़ लिया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस आयोजन को पार्टी विशेष का कार्यक्रम बताकर आलोचना की और आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार कांग्रेस की विरासत को खत्म करने का प्रयास कर रही है। बीजेपी नेता घनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का अहम हिस्सा रहा है और इसे किसी राजनीतिक दल से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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इतिहास और महत्व
वंदे मातरम् की रचना 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, और यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों की आवाज़ बना। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति प्रेम, सम्मान और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है।
वर्तमान संदर्भ में वंदे मातरम्
150वें वर्षगांठ समारोह ने देशभर में देशभक्ति की भावना को पुनर्जीवित किया है। महामारी के बाद यह आयोजन राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का एक मजबूत संदेश रहा। इसके साथ ही, यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र भी बना
राजस्थान में वंदे मातरम् की सियासत ने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उत्सव के पीछे राजनीतिक रंग भर दिया है। जबकि विश्व रिकॉर्ड जैसी उपलब्धि गर्व का विषय है, वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने इसे विवादास्पद भी बना दिया है। इस कार्यक्रम ने एक बार फिर से यह स्पष्ट किया है कि वंदे मातरम् न केवल एक गीत है, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास का अमूल्य हिस्सा है।
