
झालावाड़, 25 जुलाई 2025 – मनोहर्थाना ब्लॉक के पीपलोदी गाँव स्थित एक सरकारी स्कूल के भवन की छत शुक्रवार सुबह प्रार्थना सभा के दौरान अचानक गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में फिलहाल सात बच्चों की मौत हो चुकी, जबकि 28 से अधिक बच्चे घायल हुए हैं। उनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है ।
घटना की शुरुआत
8:30 बजे के करीब जब बच्चों को सुबह की प्रार्थना सभा के लिए इकट्ठा किया गया था, तब अचानक भवन की पुरानी छत भरभराकर गिर गई। उस समय लगभग 40 बच्चे समेत स्टाफ भी मौजूद थे, जिन्होंने क्षणभंगुर लापरवाही की वजह से भारी त्रासदी देखी । स्थानीय ग्रामीण और टीचर्स ने मिलकर मलबे में फंसे बच्चों को बाहर निकाला। घटनास्थल पर जेसीबी मशीनों द्वारा बचाव कार्य किया गया
घायल बच्चों का इलाज जारी
प्राथमिक उपचार के बाद 35 बच्चे मनोहर्थाना अस्पताल लाए गए, जिनमें से 11 की हालत नाजुक थी। इन्हें जिल्हा अस्पताल, झालावाड़ में स्थानांतरित किया गया है शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घायल बच्चों के उचित इलाज का निर्देश दिया और उच्चस्तरीय जाँच की घोषणा की
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने X पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि “यह हादसा अत्यंत दर्दनाक है। बच्चों का इलाज सुनिश्चित करें” और परिवारों को धैर्य रखने की शोकाकुल संवेदनाएं प्रेषित कीं
- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा – “इस हादसे में कई बच्चों और शिक्षकों की हानि की सूचना मिली है, ईश्वर से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूँ”
- कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने पलटवार करते हुए कहा कि यह बीजेपी सरकार की जवाबदेही है, क्योंकि इन भवनों की रिपोर्ट हर तिमाही शिक्षा विभाग में जाती है। उन्होंने ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग की और प्रदेश नेतृत्व से जमीनी सचेतनाओं को गंभीरता से लेने की अपील की
- वहीं विपक्षी कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज कर दिए, जिसमें शिक्षा एवं निर्माण कार्य की उपेक्षा को सवालों के घेरे में लाया गया
व्यवस्था को लेकर शिकायतें पहले से थी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूल भवन जर्जर स्थिति में महीनों से था। कई बार प्रशासन को शिकायत पहुंच चुकी थी, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। BJP विधायक द्वारा भेजे गए चेतावनी पत्र अभी सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं ।
क्या संकेत मिल रहे हैं?
ग्रामीण स्कूलों की मौजूदा संरचना और रखरखाव पर चिंता बढ़ी है। आगामी शिक्षा बजट और भवन सर्वेक्षण में गम्भीर सुधार की आवश्यकता उत्पन्न हुई है। राजनीतिक जवाबदेही और सुशासन कोयोग्यता इस घटना के बाद जनता के सवालों में प्रमुख हो गई। 
यह दुखद घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि शिक्षा के मूलभूत ढांचे में व्यापक त्रुटियों का संकेत है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो चुकी है। अब शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और सरकार के लिए जरूरत है कि सभी सरकारी स्कूलों की संरचनात्मक जांच, मरम्मत की जिम्मेदारी, और जवाबदेही स्थापित की जाए।
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