
शुरुआत से स्थगन तक
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 1 सितंबर 2025 को शुरू हुआ, जैसा कि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा जारी अधिसूचना में उल्लिखित था। सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। कांग्रेस विधायकों ने “वोट चोर गद्दी छोड़ो” के नारे लगाते हुए तख्तियां लहराईं, जबकि निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने “खेजड़ी बचाओ” पोस्टर लेकर सदन पहुंचे। सत्र से पहले स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन कांग्रेस ने इसे बहिष्कार कर दिया, जिसकी भाजपा ने आलोचना की। सत्र में कुल सात से दस बैठकें होने की संभावना थी, लेकिन हंगामे के कारण यह सीमित रहा।

सत्र का मुख्य एजेंडा लंबित विधेयकों को पारित करना था। बजट सत्र में प्रवर समिति को भेजे गए तीन विधेयक—राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण विधेयक, भूजल प्रबंधन विधेयक और भू-राजस्व संशोधन विधेयक—इस सत्र में चर्चा के लिए लाए गए। इसके अलावा, कैबिनेट द्वारा मंजूर तीन नए विधेयक भी पेश किए गए। सत्र में कुल सात विधेयक लाने का लक्ष्य था, जिसमें स्वास्थ्य, श्रम और मत्स्य पालन से जुड़े संशोधन शामिल थे। हालांकि, विपक्ष के लगातार बहिष्कार और हंगामे ने कार्यवाही को प्रभावित किया।
सत्र के दौरान हंगामा
मानसून सत्र की प्रत्येक बैठक हंगामे से भरी रही। विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों—जैसे वोट चोरी के आरोप, खेजड़ी संरक्षण, और सरकारी नीतियों की आलोचना—पर सदन में नारेबाजी की। 3 सितंबर को जीएसटी संशोधन और कारखाना संशोधन विधेयक पर बहस हुई, लेकिन विपक्ष ने भाग नहीं लिया। सत्र के अंतिम दिन, 10 सितंबर क��, दो प्रमुख विधेयक पारित करने का प्रयास किया गया। विपक्ष ने बहिष्कार किया, जिससे सदन की कार्यवाही बिना बहस के आगे बढ़ी। स्पीकर देवनानी ने कहा, “विपक्ष ने सदन के नेता को बोलने का अवसर नहीं दिया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है।”
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, “विपक्ष सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में सदन का अपमान कर रहा है।” सत्र में कुल 181 घंटे की कार्यवाही हुई, लेकिन उत्पादकता कम रही। पिछले बजट सत्र की तरह, यह सत्र भी हंगामे के कारण अनिश्चितकालीन स्थगन पर समाप्त हुआ। सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में चर्चा हुई थी कि सदन को बिना गतिरोध चलाया जाए, लेकिन विपक्ष का रवैया बदला नहीं।
Rajasthan Assembly Monsoon Session: पारित विधेयक: प्रावधान
भूजल प्रबंधन प्राधिकरण विधेयक, 2024 का गठन और संरचना
राजस्थान भूजल प्रबंधन प्राधिकरण विधेयक, 2024 (जिसे कभी-कभी 2025 के रूप में भी संदर्भित किया गया) राज्य में भूजल संकट को संबोधित करने के लिए लाया गया। यह विधेयक राजस्थान ग्राउंड वाटर (कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट) अथॉरिटी बिल के रूप में जाना जाता है। विधेयक के अनुसार, राज्य स्तर पर “राजस्थान भूजल संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण” की स्थापना की जाएगी। प्राधिकरण का नेतृत्व एक चेयरपर्सन करेगा, जो मुख्य सचिव या भूजल विभाग के उच्च अधिकारी के पद पर अनुभवी व्यक्ति होगा। प्राधिकरण में दो विधायक, दो भूजल विशेषज्ञ, और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इसका मुख्य उद्देश्य भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकना और संरक्षण को बढ़ावा देना है। राजस्थान में 2023 में भूजल निकासी 17.05 अरब घन मीटर थी, जबकि पुनर्भरण केवल 12.58 अरब घन मीटर, जिससे 4.47 अरब घन मीटर का घाटा हुआ। राज्य 1.49 लीटर भूजल निकालता है हर 1 लीटर पुनर्भरण के मुकाबले। विधेयक बजट सत्र में पेश हुआ था, लेकिन विपक्ष की आपत्तियों पर प्रवर समिति को भेजा गया। समिति ने विवादास्पद प्रावधानों—जैसे किसानों पर टैरिफ—को हटा दिया।
नियंत्रण के प्रमुख प्रावधान
प्राधिकरण के पास भूजल निकासी का नियमन करने की शक्तियां होंगी। अनधिकृत बोरवेल खुदाई, प्रदूषण, और बिना अनुमति ड्रिलिंग पर सख्त सजा का प्रावधान है। उल्लंघन पर 6 महीने तक की जेल और 50,000 से 1 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। डार्क जोन क्षेत्रों (ओवर-एक्सप्लोइटेड ब्लॉक्स, जहां 216 ब्लॉक्स प्रभावित हैं) में निकासी पर प्रतिबंध होगा। ट्यूबवेल और ड्रिलिंग मशीनरी का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
प्राधिकरण वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग पर मात्रा के आधार पर टैरिफ लगाएगा, लेकिन सिंचाई को छूट दी गई है। जिला स्तर पर समितियां बनेंगी जो स्थानीय भूजल प्रबंधन योजनाएं तैयार करेंगी। वर्षा जल संचयन को अनिवार्य किया जाएगा, विशेषकर 1,000 वर्ग मीटर से बड़े भवनों के लिए। विधेयक पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत दंडनीय अपराधों को मजबूत करता है। यह मॉडल ग्राउंड वाटर बिल, 2016 पर आधारित है, जो केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सुझाया गया।
सरहदी इलाकों में पानी की गंभीर चिंता
राजस्थान के सरहदी जिलों—जैसे बाड़मेर, जैसलमेर, और गंगानगर—में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। विधेयक इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देता है। प्राधिकरण अंतरराज्यीय जल विवादों को संभालेगा और पंजाब, हरियाणा से जल प्रवाह की निगरानी करेगा। डार्क जोन्स में नई बोरवेल ड्रिलिंग प्रतिबंधित होगी। सरहदी इलाकों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष फंड बनेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विधेयक भूजल को 2030 तक स्थिर करने में मदद करेगा। विपक्ष ने कहा कि बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है, लेकिन सरकार ने इसे आवश्यक बताया।

विधेयक का महत्व
यह विधेयक राजस्थान के 142 ओवर-एक्सप्लोइटेड ब्लॉक्स को बचाने का प्रयास है। इससे औद्योगिक इकाइयों को पारदर्शी अनुमति मिलेगी, लेकिन किसानों को राहत। पारित होने से राज्य का भूजल संतुलन सुधरेगा, जो कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
भू-राजस्व संशोधन विधेयक
राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक, 2025 भू-राजस्व अधिनियम, 1956 में संशोधन करता है। इसका मुख्य उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों की वैधता सुनिश्चित करना और राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम लिमिटेड (RIICO) को मजबूत बनाना है। विधेयक 35 औद्योगिक क्षेत्रों को वैधता प्रदान करता है। बजट सत्र में पेश होने पर विपक्ष और कुछ भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताई, जिससे इसे प्रवर समिति को भेजा गया। समिति की सिफारिशों के बाद यह पारित हुआ।
Rajasthan Assembly Monsoon Session: प्रमुख प्रावधान
विधेयक RIICO को औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक शक्तियां देता है। RIICO अब लेआउट प्लान तैयार करने, संशोधन, प्लॉट सब-डिवीजन, मर्जर, भूमि उपयोग परिवर्तन, अनुमतियां, और भूमि वितरण का अधिकार रखेगा। यह “किसी अन्य कानून के बावजूद” RIICO को प्राथमिकता देता है। 18 सितंबर 1979 से पहले आवंटित भूमि पर यह लागू नहीं होगा, जहां लीज रद्द हो चुकी हो।
विधेयक भूमि विवादों को कम करेगा, मुकदमेबाजी घटाएगा, और निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा। RIICO को भूमि रूपांतरण और आवंटन की शक्ति मिलेगी, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देगी। विपक्ष ने कहा कि यह अधिकारियों को असीमित शक्ति देता है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इसे औद्योगिक विकास का कदम बताया।
औद्योगिक विकास पर प्रभाव
यह विधेयक राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगा। राजस्थान में 35 RIICO क्षेत्र वैध हो जाएंगे, जिससे निवेश बढ़ेगा। इससे रोजगार सृजन होगा और विवाद सुलझेंगे। सरकार का दावा है कि इससे राज्य जीडीपी में 5-7% वृद्धि संभव है।
GST संशोधन पर धन्यवाद प्रस्तावना
सदन ने जीएसटी दरों में संशोधन के लिए केंद्र सरकार के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। हाल ही में केंद्र ने जीएसटी परिषद की सिफारिशों पर कई वस्तुओं—जैसे दोपहिया वाहन, ई-वाहन, और कृषि उत्पादों—पर दरें कम कीं। मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा, “इससे आमजन, किसान और व्यापारियों को राहत मिलेगी। राज्यों की आय में पारदर्शिता आएगी।”
प्रस्ताव में कहा गया कि जीएसटी संशोधन से राज्य राजस्व बढ़ेगा, जो विकास कार्यों के लिए उपयोगी होगा। विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद, यह प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ। राजस्थान माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक-2025 भी इसी सत्र में चर्चा का विषय था, जो राज्य जीएसटी को केंद्र के साथ संरेखित करता है। इससे व्यापारियों को 50% छूट मिलेगी इस्तेमाल किए वाहनों पर।
GST संशोधन का प्रभाव
Rajasthan Assembly Monsoon Session: केंद्र के फैसले से राजस्थान को सालाना 1,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। किसानों को कृषि उपकरणों पर कम टैक्स का लाभ होगा। व्यापारियों की राहत से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। यह प्रस्ताव सत्र का सकारात्मक नोट था।
