मुक्तिधाम में सुविधाओं का अभाव
कैकड़ा गांव का मुक्तिधाम बदहाली का शिकार है। यहां न तो बारिश से बचाव के लिए टीन शेड है और न ही अंतिम संस्कार के लिए चबूतरा। मृतक नारायण सिंह लोधी के परिजनों को बारिश में भीगते हुए अंतिम संस्कार करना पड़ा। बारिश के कारण चिता को अग्नि देना भी मुश्किल हो गया। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों का गुस्सा जायज है, क्योंकि सरकार हर ग्राम पंचायत में मुक्तिधाम निर्माण के लिए लाखों रुपये खर्च करने का दावा करती है। फिर भी, कैकड़ा जैसे गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

Kaikda Village Crematorium: कागजों पर हुआ निर्माण
कैकड़ा गांव में मुक्तिधाम निर्माण को लेकर प्रशासन की उदासीनता साफ नजर आती है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के अमृत महोत्सव के बाद भी गांव में कोई बदलाव नहीं आया। सवाल उठता है कि क्या मुक्तिधाम का निर्माण केवल कागजों पर हुआ है? यदि धरातल पर काम नहीं हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत के अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि फंड का दुरुपयोग हो रहा है, और जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति को मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग
कैकड़ा गांव के निवासियों ने प्रशासन से मुक्तिधाम में टीन शेड और चबूतरे के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में अंतिम संस्कार करना असंभव-सा हो जाता है। यह न केवल मृतक के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीणों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाता है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए। ग्राम पंचायत कैकड़ा में मुक्तिधाम की स्थिति सुधारने के लिए ठोस योजना बनानी होगी।
यशपाल लोधी की रिपोर्ट
